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विश्व शक्तियों और ईरान के बीच परमाणु समझौते में वापसी के मुद्दे पर बातचीत हुई

In this Handout photo made available by the EU delegation in Vienna shows Diplomats of the EU, China, Russia and Iran at the start of talks at the Grand Hotel in Vienna on April 6, 2021. - The US will participate in discussions in Vienna to try to save the international agreement on Iranian nuclear power. However, they will not be at the same table as Tehran and it is the Europeans who will serve as intermediaries between the two parties, in the hope of achieving concrete results after two months of impasse. (Photo by LARS TERNES / various sources / AFP) / RESTRICTED TO EDITORIAL USE - MANDATORY CREDIT "AFP PHOTO / EU DELEGATION IN VIENNA / LARS TERNES " - NO MARKETING - NO ADVERTISING CAMPAIGNS - DISTRIBUTED AS A SERVICE TO CLIENTS

विएना: रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान (Iran) और विश्व शक्तियों के बीच मंगलवार को एक रचनात्मक वार्तालाप हुई जिसमें ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को वॉशिंगटन द्वारा हटाए जा सकने वाले कार्य समूहों के गठन करने पर सहमति व्यक्त की गई क्योंकि वे 2015 के परमाणु समझौते में वापसी करना चाहते है।

यूरोपीय मध्यस्थों ने विएना में ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत करना शुरू कर दी है क्योंकि वे दोनों देशों को समझौते के अनुपालन में लाना चाहते हैं, जिन्होंने अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear program of Iran) के लिए ईरान के बदले में प्रतिबंधों को हटा लिया था।

मंगलवार को हुई बातचीत में ईरान, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी और रूस ने संयुक्त आयोग नाम की एक बैठक आयोजित की जिसकी अध्यक्षता यूरोपीय संघ ने की हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस बैठक में भाग नहीं लिया।

बताया जा रहा है कि वाशिंगटन और तेहरान को इस वार्ता से किसी भी तरह की सफलता की उम्मीद नहीं है हालांकि यूरोपीय संघ के साथ उन्होंने इसमें सकारात्मकता का वर्णन किया है।

दो विशेषज्ञ स्तर के समूहों को ईरान पर लगे उन प्रतिबंधों की सूची दी गई है जिनको अमेरिका द्वारा हटाया जा सकता है।
ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार अब्बास इराक़ची ने ईरानी टीवी को बताया कि वियना में हुई वार्तालाप रचनात्मक थी और अब हमारी अगली बैठक शुक्रवार को होगी।

ऐसा माना जा रहा है कि परमाणु मुद्दे के हल होने से मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है,खासकर ईरान, इस्राईल और खाड़ी के देशों के बीच जो ईरान द्वारा परमाणु हथियारो की प्राप्ति से डरते है।

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