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ग़ाज़ा में लगभग 8 हज़ार शव अब भी मलबे में दबे हैं: ग़ाज़ा अधिकारी

ग़ाज़ा में लगभग 8 हज़ार शव अब भी मलबे में दबे हैं: ग़ाज़ा अधिकारी

ग़ाज़ा के अधिकारियों का कहना है कि, ग़ाज़ा में लगभग 8 हज़ार शव अब भी मलबे में दबे हुए हैं। सिविल डिफेंस की टीमें बेहद कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण कई तबाह स्थानों तक पहुँच नहीं पा रही हैं। ग़ाज़ा के नागरिक सुरक्षा विभाग (सिविल डिफेंस) के प्रवक्ता का दावा है कि लगातार खोज और राहत अभियानों के बावजूद, ग़ाज़ा पट्टी के विभिन्न इलाकों में ध्वस्त इमारतों के मलबे के नीचे लगभग 8 हज़ार शव दबे हुए हैं।

गुरुवार को जारी एक प्रेस बयान में महमूद बसल ने बताया कि, सिविल डिफेंस की टीमें अत्यंत कठिन हालात और सीमित साधनों के साथ काम कर रही हैं, जबकि कई तबाह स्थलों तक पहुँचना संभव नहीं हो पाया है।

उन्होंने यह भी कहा कि 3 हज़ार से अधिक लोग अब भी लापता हैं और उनके बारे में कोई पुष्टि नहीं है कि वे जीवित हैं, शहीद हो चुके हैं या इज़रायली हिरासत में हैं। उनका कहना था कि लंबा समय बीत जाने और भारी मशीनरी व आवश्यक तकनीकी उपकरणों की गंभीर कमी के कारण मलबा हटाने के कार्य में भारी कठिनाइयाँ आ रही हैं। इस दौरान सैकड़ों शव सड़-गल चुके हैं या उनकी पहचान करना असंभव हो गया है।

हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के अनुसार, ग़ाज़ा कम से कम 61 मिलियन टन मलबे के नीचे दबा हुआ है, जिसका अधिकांश हिस्सा संभावित रूप से खतरनाक हो सकता है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि सावधानी नहीं बरती गई तो लगभग 15 प्रतिशत मलबा एस्बेस्टस, औद्योगिक कचरे या भारी धातुओं से दूषित होने का गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

बाद में एजेंसी ने बताया कि लगभग दो-तिहाई तबाही इज़रायली हमलों के पहले पाँच महीनों में हुई, जबकि हालिया युद्ध-विराम तक के महीनों में भी नुकसान जारी रहा। यूएनडीपी का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य सात वर्षों तक चल सकता है और पुनर्निर्माण के व्यापक प्रयासों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी।

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