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ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4 की 67वीं लहर में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला

ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4 की 67वीं लहर में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सिपाह) ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए दावा किया है कि रमज़ान के आख़िरी जुमे की सुबह “67वीं लहर” के तहत एक व्यापक सैन्य अभियान चलाया गया। इस अभियान को “वादा-ए-सादिक 4” नाम दिया गया है, जिसे धार्मिक और प्रतीकात्मक नारे “या साहिब-ए-ज़मां अदरिकनी” के साथ अंजाम दिया गया।

सिपाह के अनुसार, यह हमला केवल एक सीमित कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक समन्वित और बहु-स्तरीय ऑपरेशन था, जिसमें भारी बैलिस्टिक मिसाइलों और बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।दावा किया गया है कि, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, उनके रडार सिस्टम और इज़रायल के क़ब्ज़े वाले इलाकों में स्थित सैन्य व सुरक्षा ढांचे को निशाना बनाना था।

बयान में कहा गया कि इस ऑपरेशन के दौरान कुवैत स्थित अली अल-सालेम एयरबेस को प्रमुख रूप से निशाना बनाया गया, जहाँ अमेरिकी व सहयोगी बलों की गतिविधियाँ होती हैं। इसके अलावा ड्रोन कमांड सेंटर, विमान मरम्मत हैंगर, हेलीकॉप्टर सपोर्ट यूनिट्स और अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर को भी निशाना बनाने का दावा किया गया।

इसी क्रम में “अल-वफ़ा बेस” में तैनात मिसाइल रक्षा प्रणाली के अर्ली वार्निंग रडार को भी लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों से सटीक रूप से हिट करने की बात कही गई है।

सिपाह ने यह भी कहा कि इज़रायल के क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों—मध्य, दक्षिण और उत्तर—में स्थित सैटेलाइट सिस्टम, रडार स्टेशन और एयर डिफेंस नेटवर्क पर भी हमले किए गए, जिनका उद्देश्य उनकी निगरानी और सुरक्षा क्षमता को कमजोर करना था। इस पूरे अभियान को प्रतीकात्मक रूप से अपने शहीद अधिकारियों, खासकर ब्रिगेडियर जनरल डॉ. अली मोहम्मद नायिनी और उनके भाई को समर्पित बताया गया।

बयान के अंत में कड़ा राजनीतिक संदेश भी दिया गया, जिसमें कहा गया कि जैसे इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का अंत हुआ, वैसे ही अमेरिका और इज़रायल के नेतृत्व को भी अंजाम भुगतना पड़ेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि यह संघर्ष जारी रहेगा और उनके अनुसार “जीत करीब है”।

कुल मिलाकर, यह बयान एक बड़े सैन्य अभियान का दावा करता है, जिसमें रणनीतिक ठिकानों, रडार सिस्टम और सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की बात कही गई है, साथ ही इसके जरिए एक मजबूत राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश देने की भी कोशिश दिखाई देती है।

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