बंकरों में रहना इन दिनों इज़रायली नागरिकों का मुक़द्दर बन गया है: आईआरजीसी
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जनसंपर्क विभाग के अनुसार:
ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4” की 64वीं लहर, साल के आख़िरी गुरुवार को, इस्लामी क्रांति के नेताओं, पवित्र रक्षा (ईरान-इराक युद्ध) के शहीदों, हरम के रक्षकों और ज़ायोनी शासन व अमेरिका के खिलाफ चल रहे युद्ध के शहीदों को समर्पित करते हुए, आज सुबह (गुरुवार, 28 इस्फंद) “या ज़हरा (स.अ.)” के पवित्र कोड के साथ शुरू की गई।
इस ऑपरेशन में कब्ज़े वाले क्षेत्रों के मध्य और उत्तरी इलाकों में स्थित लक्ष्यों पर हमला किया गया, जिनमें बेन गुरियन (एयरपोर्ट), ज़ायोनी शासन के मुख्य सैन्य जमावड़े और सपोर्ट सेंटर, ईंधन आपूर्ति केंद्र आदि शामिल हैं। साथ ही हाइफ़ा के मध्य क्षेत्र, वहां के सैन्य जमावड़े, रिफाइनरी और रिशोन लेत्सियोन को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों में “क़दर”, “इमाद”, “खैबरशिकन” और कई वारहेड वाले “खोर्रमशहर” मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
इसके अलावा, अमेरिकी सेना के “पांचवें नौसैनिक बेड़े” को भी मध्यम दूरी की ठोस और तरल ईंधन वाली मिसाइल प्रणालियों से सटीक निशाना बनाया गया। बताया गया है कि यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक और लगातार जारी है।
कहा गया है कि इन दिनों ज़ायोनी लोगों की ज़िंदगी बंकरों में सीमित हो गई है और वे कुछ समय के लिए भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। 63वीं लहर की शुरुआत से अब तक, कब्ज़े वाले इलाकों के 50 लाख से अधिक लोग लंबे समय से बंकरों में रहने को मजबूर हैं।
जनरल क़ासिम सुलेमानी का हवाला देते हुए कहा गया: “हम इस मैदान के असली खिलाड़ी हैं, हम आपको छोड़ेंगे नहीं, आप बुरी तरह पराजित होंगे।” यह कार्रवाई ज़ायोनी शासन और अमेरिका की आक्रामकता का सिर्फ एक छोटा सा जवाब बताया गया है। यह ऑपरेशन अभी भी जारी है…

