दक्षिण लेबनान में इज़रायल की कार्रवाई “युद्ध अपराध” है: साद हरीरी
लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री साद हरीरी ने राजनीतिक मंच पर लौटने की घोषणा के बाद कहा कि, हिज़्बुल्लाह के साथ बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने इस दौरान दक्षिण लेबनान में हाल ही में हुई इज़रायल की कार्रवाई को “युद्ध अपराध” बताया। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी फ़ार्स की रिपोर्ट के अनुसार, साद हरीरी, जो कल ही लेबनान की राजनीतिक दुनिया में वापसी कर चुके हैं, ने विभिन्न मुद्दों पर अपने रुख़ जैसे कि हथियारों का एकाधिकार, हिज़्बुल्लाह के साथ बातचीत, इज़रायल के दक्षिण लेबनान पर हमले, सऊदी अरब की भूमिका, सीरिया की यात्रा आदि पर विस्तार से बयान दिया।
उन्होंने अपने पिता रफीक़ हरीरी की हत्या की 21वीं बरसी के मौक़े पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, आज की सरकार सभी का समर्थन करने की भूमिका निभा रही है। उन्होंने सरकार की हथियारों को सीमित करने की पहल को “अच्छा क़दम” बताया और देश में स्थिरता बढ़ाने और सरकार की भूमिका मज़बूत करने पर ज़ोर दिया। दक्षिणी मुद्दे पर उन्होंने इज़रायल द्वारा क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का हवाला देते हुए कहा कि दक्षिण लेबनान में जो कुछ भी हो रहा है, वह “युद्ध अपराध” है, बिल्कुल ग़ाज़ा की तरह।”
हिज़्बुल्लाह लेबनान की सामाजिक और राजनीतिक संरचना का हिस्सा है
हरीरी ने हिज़्बुल्लाह के अधिकारियों से किसी भी मुलाकात को ख़ारिज करते हुए कहा कि, ऐसी मुलाकातें “कभी नहीं हुईं”, लेकिन हकीकत यह है कि हिज़्बुल्लाह लेबनान की सामाजिक और राजनीतिक संरचना का हिस्सा है और सरकार के ढांचे के भीतर, शीया समुदाय की पार्टियों के साथ बातचीत जारी रहती है।
जहां तक उनकी आगामी सीरिया यात्रा का सवाल है, उन्होंने कहा कि, उनकी यात्रा यात्रा की योजना पहले थी, लेकिन तय दिन पर ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के कारण उनकी यात्रा में देरी हुई। उन्होंने राजनीति छोड़ने का कारण “देश में साथी का अभाव” बताया और देश के आंतरिक राजनीतिक माहौल पर कहा कि “अभी तक देश का माहौल चुनावी माहौल नहीं है।”
हरीरी ने यह भी उम्मीद जताई कि वर्तमान की तरह एक तकनीकी सरकार बने और देश में सुधारों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने सऊदी अरब की लेबनान में भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसने “तायफ़ समझौते को मज़बूत किया और स्थिरता का समर्थन किया।”
साद हरीरी, जिनके पिता की हत्या 14 फरवरी 2005 को हुई थी, लेबनान की आंतरिक राजनीति में प्रमुख रहे। वे पहली बार नवंबर 2009 से जनवरी 2011 तक और दूसरी बार दिसंबर 2016 से जनवरी 2020 तक प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने 2019 में लेबनान की राजनीतिक प्रणाली में बड़े सुधार की मांग करते हुए इस्तीफ़ा दिया और 2022 में राजनीति छोड़ने की घोषणा की तथा उस साल के संसदीय चुनावों का बहिष्कार कर यूएई चले गए।
कल, राय अल-यौम के संपादक अब्दुल बारी अत्वान ने कहा कि हिज़्बुल्लाह और मुसाफ़िर पार्टी के प्रतिनिधियों की गुप्त मुलाकातों की खबरें मिली हैं। उन्होंने लिखा कि दोनों पक्ष आगामी संसदीय चुनावों, विशेषकर बेरुत, सिदा (हरिरी के पिता का गृह नगर) और अल-बेक़ा के प्रमुख क्षेत्रों में अपनी रणनीति में सहमति पर पहुंचे हैं।
हिज़्बुल्लाह से संपर्क को खारिज करते हैं
उनके अनुसार, साद हरीरी और उनके समर्थक किसी भी हिज़्बुल्लाह से संपर्क होने की बात को खारिज करते हैं। वे सऊदी अरब के साथ गहरे संबंध और उस पर भरोसा बनाए रखने तथा रियाद के साथ समन्वय जारी रखने पर ज़ोर देते हैं। कुछ दिन पहले, राय अल-यौम ने हरीरी की राजनीतिक वापसी की भविष्यवाणी करते हुए, राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर इमाद सलाम के हवाले से लिखा कि सऊदी अरब लेबनान में एक मज़बूत और संगठित सुन्नी नेतृत्व की तलाश में है। यदि हरीरी खुद को इस रूप में पेश कर पाए, तो उनकी वापसी सऊदी अरब के हितों की पूर्ति करेगी।

