इज़रायली सैनिक ने नमाज़ अदा कर रहे फ़िलिस्तीनी पर गाड़ी चढ़ा दी
क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में एक इज़रायली सैनिक ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए सड़क किनारे नमाज़ अदा कर रहे एक फ़िलिस्तीनी व्यक्ति पर वाहन चढ़ा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमले के समय सैनिक की पीठ पर राइफ़ल लटकी हुई थी और उसने सड़क किनारे नमाज़ पढ़ रहे फ़िलिस्तीनी व्यक्ति को एटीवी वाहन से कुचल दिया।
इज़रायली सेना का कहना है कि उन्हें एक सशस्त्र व्यक्ति द्वारा एक फ़िलिस्तीनी को वाहन से कुचलने की फुटेज मिली है। संबंधित व्यक्ति एक रिज़र्व सैनिक था, हालांकि उसका सैन्य अनुबंध समाप्त कर दिया गया है। इज़रायली सेना ने स्पष्ट किया कि घटना के बाद उस व्यक्ति से हथियार ज़ब्त कर लिए गए, क्योंकि उसने अपने अधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया था।
सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि, इज़रायली व्यक्ति फ़िलिस्तीनी पर गाड़ी चढ़ा देता है, जिससे वह ज़मीन पर गिर जाता है। वीडियो में यह भी दिखता है कि नागरिक कपड़ों में मौजूद सैनिक फ़िलिस्तीनी पर चिल्लाता है और इशारों से उसे वहाँ से चले जाने को कहता है।
नमाज़ अदा कर रहे फ़िलिस्तीनी नागरिक पर इज़रायली सैनिक द्वारा वाहन चढ़ाए जाने की घटना मानवता और क़ानून, दोनों के लिए खुली चुनौती है। यह कृत्य किसी क्षणिक उकसावे का परिणाम नहीं, बल्कि उस दंडहीनता का प्रतीक है जो वर्षों से फ़िलिस्तीनी नागरिकों पर होने वाली ज्यादतियों को बढ़ावा देती रही है। सड़क किनारे शांति से इबादत कर रहे व्यक्ति पर एटीवी चढ़ाना न केवल क्रूरता है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का घोर अपमान भी है।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो ने इस बर्बरता को निर्विवाद रूप से उजागर कर दिया है। हथियार लटकाए हुए, शक्ति और वर्दी के भरोसे किया गया यह हमला बताता है कि, कैसे बल का प्रयोग कानून से ऊपर समझ लिया गया है। पीड़ित के ज़मीन पर गिरने के बाद भी आक्रामक व्यवहार और धमकाने वाले इशारे उस मानसिकता को दर्शाते हैं जिसमें जवाबदेही की कोई जगह नहीं बचती।
इज़रायली सेना द्वारा इसे “एक सशस्त्र व्यक्ति” की कार्रवाई बताकर अनुबंध समाप्त करने की औपचारिक घोषणा पर्याप्त नहीं है। हथियार ज़ब्त करना या प्रशासनिक कार्रवाई तब तक अर्थहीन है, जब तक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के साथ दोषियों को वास्तविक दंड न मिले। मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किसी एक व्यक्ति की “गलती” कहकर टाला नहीं जा सकता; यह संरचनात्मक समस्या की ओर संकेत करता है।
यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चेतावनी है कि बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाए जाएँ। नागरिकों की सुरक्षा, धार्मिक स्थलों और इबादत की आज़ादी का सम्मान, और कानून के शासन की पुनर्स्थापना अनिवार्य है। पीड़ित को अस्पताल से घर भेज देना न्याय नहीं है; न्याय तब होगा जब ऐसे कृत्यों पर शून्य सहिष्णुता दिखाई जाए। हमले के बाद फ़िलिस्तीनी व्यक्ति को अस्पताल ले जाया गया, हालांकि बाद में उसे घर भेज दिया गया।

