नेतन्याहू को चुनावी फ़ायदा पहुंचाने के लिए इज़रायली मीडिया ग़ाज़ा युद्ध के लिए माहौल तैयार कर रही: हारेट्ज़
इज़रायली दैनिक अख़बार हारेट्ज़ के सैन्य पत्रकार आमोस हारेल ने लिखा है कि नेतन्याहू की कैबिनेट फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के खिलाफ़ नए संघर्ष की शुरुआत के लिए मीडिया के माध्यम से माहौल तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि इज़रायली सेना जानबूझकर युद्ध-विराम समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर रही है, ताकि युद्ध दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक बहाना हासिल किया जा सके।
हारेट्ज़ ने यह भी ज़ोर देकर कहा कि नेतन्याहू दक्षिणी मोर्चे पर तनाव बनाए रखते हुए तथा लेबनान और ईरान के मोर्चों पर मौजूद अपेक्षाकृत शांति का राजनीतिक लाभ उठाकर आगामी अक्टूबर में होने वाले चुनावों में अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहते हैं। उसके अनुसार, सैन्य अभियानों को जारी रखना ज़ायोनी प्रधानमंत्री को फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के सामने अपनी पिछली असफलताओं को छिपाने में मदद दे सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध-विराम समझौते की शर्तों के उल्लंघन और लगातार सैन्य दबाव की नीति के पीछे केवल सुरक्षा का तर्क नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति में अपनी गिरती साख को संभालने की कोशिश भी देखी जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, नेतन्याहू आगामी चुनावों में स्वयं को “सख़्त नेता” के रूप में पेश करने की रणनीति अपना सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि सैन्य अभियान चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, तो इससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है तथा शांति की संभावनाओं को गहरा आघात पहुंच सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि सैन्य अभियान चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, तो इससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है तथा शांति की संभावनाओं को गहरा आघात पहुंच सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या युद्ध और सैन्य कार्रवाई को राजनीतिक अस्तित्व बचाने के औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो इसकी कीमत केवल राजनीति नहीं, बल्कि निर्दोष नागरिकों की जान, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की शांति को चुकानी पड़ सकती है।

