क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की इज़रायली कोशिशें बढ़ रही हैं: एर्दोगान
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह खालिद अल-सबाह से बातचीत के दौरान कहा कि, इज़रायल द्वारा क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिशों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने तेल अवीव द्वारा अलगाववादी “सोमालीलैंड” को मान्यता देने के फैसले को इसका उदाहरण बताया।
तुर्की के संचार निदेशालय के अनुसार, सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया जाना चाहिए। एर्दोगान ने शेख सबाह के साथ फोन पर हुई बातचीत में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि वे तुर्की-कुवैत द्विपक्षीय संबंधों को सभी क्षेत्रों में मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं और यह भी कहा कि, दोनों देशों के बीच सहयोग में लगातार वृद्धि होती रहेगी।
इस दौरान ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण को लेकर उम्मीद जताते हुए एर्दोगानन ने कहा कि, स्थायी युद्ध-विराम और शांति की प्राप्ति के बाद इसका आरंभ होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में तुर्की और कुवैत के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
इसके अलावा, एर्दोगान ने नाइजर के राष्ट्रपति अब्दुर्रहमान चियानी से भी फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा की। तुर्की के संचार निदेशालय के अनुसार, तुर्की-नाइजर संबंधों को मजबूत बनाने पर ज़ोर दिया गया। फोन कॉल के दौरान एर्दोआन ने सभी क्षेत्रों में नाइजर को तुर्की के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया। तुर्की के राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि, वे विशेष रूप से ऊर्जा, खनन और रक्षा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए कदम उठाते रहेंगे।
गौरतलब है कि सोमालीलैंड, जिसे इज़रायल ने एक नई राज्य के रूप में मान्यता दी है, सोमालिया के एक अलगाववादी आंदोलन का हिस्सा है। हालांकि, इज़रायल के इस कदम की पूरी अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने निंदा की है, जिसमें अरब लीग, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ भी शामिल हैं। इन सभी ने सोमालिया की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है।
सोमालीलैंड को मान्यता दिए जाने के परिणामस्वरूप क्षेत्र में अन्य अलगाववादी आंदोलनों को भी बल मिलेगा और वे अपनी कोशिशें तेज़ कर सकते हैं। तुर्की के राष्ट्रपति ने इज़रायल की इस भड़काऊ कार्रवाई की ओर कुवैत के क्राउन प्रिंस का ध्यान आकर्षित किया और अपनी गहरी चिंताओं का इज़हार किया।

