इज़रायल किसी भी मोर्चे पर जीत की स्थिति में नहीं: पूर्व इज़रायली पीएम
इज़रायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने शुक्रवार तड़के दिए अपने बयान में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इज़रायल इस समय किसी भी सक्रिय युद्ध मोर्चे—चाहे वह लेबनान की उत्तरी सीमा हो, ग़ाज़ा पट्टी हो या ईरान के साथ बढ़ता तनाव—पर स्पष्ट रूप से जीत की स्थिति में नहीं है।
बेनेट ने संकेत दिया कि ग़ाज़ा में लंबे समय से चल रहे सैन्य अभियानों के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं। हमास के खिलाफ कार्रवाई जारी रहने के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है, जिससे यह संघर्ष लंबा और जटिल होता जा रहा है।
वहीं, लेबनान सीमा पर हिज़्बुल्लाह के साथ लगातार तनाव और झड़पों ने उत्तरी मोर्चे को भी अस्थिर बनाए रखा है। बेनेट के अनुसार, यह स्थिति इज़रायल के लिए एक स्थायी सुरक्षा चुनौती बन गई है, जहां किसी भी समय व्यापक टकराव का खतरा बना रहता है।
ईरान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सीधे या परोक्ष टकराव की स्थिति में भी इज़रायल को कोई स्पष्ट रणनीतिक बढ़त हासिल नहीं हो रही है। क्षेत्रीय स्तर पर ईरान के प्रभाव और उसके सहयोगी समूहों की सक्रियता ने हालात को और पेचीदा बना दिया है।
बेनेट ने अप्रत्यक्ष रूप से मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल सैन्य कार्रवाई से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि एक व्यापक और स्पष्ट रणनीति की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि आंतरिक राजनीतिक दबाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और लगातार चल रहे संघर्ष इज़रायल की स्थिति को और कमजोर कर रहे हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब इज़रायल के भीतर भी सरकार की नीतियों, सुरक्षा रणनीति और युद्ध के परिणामों को लेकर बहस तेज हो रही है। कई विश्लेषक इसे एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं कि अगर मौजूदा हालात में बदलाव नहीं किया गया, तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

