इस्राईल चुनाव लाइव: नेतन्याहू और आइज़ेनकोट के गठबंधनों के बीच कड़ी टक्कर
इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि दक्षिणपंथी दलों ने “यहूदी राष्ट्रवादी जनता के बीच निर्णायक बहुमत” हासिल कर लिया है। उन्होंने एक “राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार” के गठन का आह्वान किया है।
हालांकि, एग्जिट पोल (मतदान के बाद मतदाताओं से पूछे गए सवालों पर आधारित अनुमान) में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट विजेता नहीं बताया गया है। इन अनुमानों के अनुसार, नेतन्याहू का गठबंधन मुख्य विपक्षी गठबंधन से मामूली बढ़त पर है। लेकिन दोनों में से कोई भी गठबंधन सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत हासिल करता हुआ नहीं दिख रहा है।
अरब दलों को मिले वोटों की संख्या अभूतपूर्व स्तर पर पहुँची
70 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी है। अब तक अरब दलों को कुल 19 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। यह एक अभूतपूर्व संख्या है, लेकिन अभी भी 30 प्रतिशत मतों की गिनती बाकी है।
अरब दलों की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
क्योंकि दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों में से किसी के पास भी सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं है। ऐसे में अरब दलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी। यदि आइज़ेनकोट सरकार बनाना चाहते हैं, तो उन्हें अरब दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा। यह समर्थन दो तरीकों से मिल सकता है—या तो अरब दल उनकी सरकार में शामिल हों, या फिर कम-से-कम उनकी सरकार के खिलाफ मतदान न करें। दूसरे विकल्प को राजनीतिक भाषा में ‘सेफ्टी नेट’ यानी सुरक्षा कवच की स्थिति कहा जाता है।
हालाँकि, जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ रही है, इस तरह की व्यवस्था की संभावना कम होती दिखाई दे रही है। आइज़ेनकोट के गठबंधन की सीटों का अनुमान घट रहा है, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन की स्थिति मजबूत होती जा रही है।

