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इस्राईल चुनाव 2026 लाइव: नेतन्याहू के सामने कड़ी चुनौती, चुनाव नतीजे तय करेंगे राजनीतिक भविष्य

इस्राईल चुनाव 2026 लाइव: नेतन्याहू के सामने कड़ी चुनौती, चुनाव नतीजे तय करेंगे राजनीतिक भविष्य

इस्राईल में मतदाता संसद के चुनाव के लिए मतदान करने जा रहे हैं। इन चुनावों में संसद यानी नेसेट (Knesset) की 120 सीटों के सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। अक्टूबर 2023 में ग़ाज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार और अंतरराष्ट्रीय अदालत द्वारा नेतन्याहू को युद्ध अपराधी घोषित किए जाने के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके नेतृत्व वाला धुर दक्षिणपंथी गठबंधन, विपक्षी खेमे के सामने चुनावी मुक़ाबले में है। विपक्षी खेमे में याशार पार्टी भी शामिल है, जिसका नेतृत्व इस्राईली सेना के पूर्व प्रमुख गैदी आइज़ेनकोट कर रहे हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू कौन हैं?

77 वर्षीय नेतन्याहू ने 2023 से ग़ाज़ा पट्टी में फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ इस्राईल के उस युद्ध का नेतृत्व किया है, जिसे लोग नरसंहार क़रार देते हैं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने उनके खिलाफ कथित युद्ध अपराधों के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

वे लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के मुक़दमे का भी सामना कर रहे हैं। आज के चुनाव में दोबारा जीत हासिल करने की कोशिश के साथ वे अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू, इस्राईल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। वे अलग-अलग कार्यकालों में कुल 19 वर्षों तक सत्ता में रहे हैं।

यहां उनके राजनीतिक जीवन और विभिन्न पदों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

राजनयिक: 1982 में नेतन्याहू को वॉशिंगटन डीसी स्थित इज़राइली दूतावास में मिशन का उप-प्रमुख नियुक्त किया गया। 1984 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल का राजदूत बनाया गया।

उप विदेश मंत्री: 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यित्ज़ाक शमीर की सरकार में नेतन्याहू को उप विदेश मंत्री नियुक्त किया गया।

लिकुड पार्टी के अध्यक्ष: 1993 में नेतन्याहू दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के अध्यक्ष बने। उन्होंने 1992 के चुनाव में हार के बाद पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की रणनीति तैयार की।

प्रधानमंत्री: नेतन्याहू ने 1996 से 1999 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2009 से 2021 तक उन्होंने लगातार 12 वर्षों तक इस पद पर काम किया। 2022 में वे छठी बार प्रधानमंत्री बने और इस्राईल के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकारों में से एक का नेतृत्व करने लगे।

गैदी आइज़ेनकोट कौन हैं?

याशार पार्टी के नेता गैदी आइज़ेनकोट पूर्व जनरल हैं। उन्होंने 2015 से 2019 तक इस्राईली सेना के प्रमुख के रूप में कार्य किया था।

उन्हें 2008 में सार्वजनिक रूप से ‘दहिया सिद्धांत’ (Dahiyeh Doctrine) की रूपरेखा प्रस्तुत करने का श्रेय दिया जाता है। इस सिद्धांत में हिज़्बुल्लाह और हमास जैसे संगठनों के ख़िलाफ़ ‘अत्यधिक असमानुपातिक बल प्रयोग’ (Disproportionate Force) करने और नागरिक बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नष्ट करने की रणनीति शामिल है।

इस्राईल की विदेश नीति से जुड़े कई मुद्दों पर आइज़ेनकोट ने अपना रुख स्पष्ट रूप से जाहिर नहीं किया है। हालांकि, वे अपने युद्ध उद्देश्यों को हासिल करने के लिए इस्राईली सरकार की अमेरिका पर निर्भरता की आलोचना करते रहे हैं। इसके बावजूद, उन्होंने उन युद्ध उद्देश्यों पर सवाल नहीं उठाए हैं जिन्हें हासिल करने की सरकार कोशिश कर रही है।

उन्होंने चुनाव के बाद बनने वाले किसी भी गठबंधन में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को शामिल करने से भी इनकार किया है।

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