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इज़रायल ने ग़ाज़ा में क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर इज़्ज़ुद्दीन हद्दाद की हत्या का दावा किया

इज़रायल ने ग़ाज़ा में क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर इज़्ज़ुद्दीन हद्दाद की हत्या का दावा किया

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने दावा किया है कि ग़ाज़ा पट्टी में हमास की सैन्य शाखा क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर (Izz ad-Din al-Qassam Brigades) के वरिष्ठ कमांडर इज़्ज़ुद्दीन हद्दाद को एक हवाई हमले में मार दिया गया है।

इज़रायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह हमला ग़ाज़ा शहर के अल-रिमाल इलाके में किया गया, जहां एक रिहायशी अपार्टमेंट को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि इस बमबारी में इज़्ज़ुद्दीन हद्दाद समेत कई अन्य लोग भी शहीद और आसपास की इमारतों को भारी नुकसान पहुँचा।

इज़रायली अधिकारियों ने इस कार्रवाई को हमास की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा बताया है। हालांकि, हमास की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फ़िलिस्तीनी सूत्रों का कहना है कि इज़रायली हमलों में लगातार रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि ग़ाज़ा में जारी युद्ध के दौरान इज़रायल कई बार हमास और क़स्साम ब्रिगेड के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाने का दावा कर चुका है। दूसरी ओर हमास का कहना है कि इज़रायली हमले फ़िलिस्तीनी जनता के मनोबल को तोड़ने की कोशिश हैं, लेकिन प्रतिरोध जारी रहेगा।

फ़िलिस्तीनी सूत्रों और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इज़रायल लगातार ग़ाज़ा के रिहायशी इलाकों, अस्पतालों और नागरिक ढांचे को निशाना बना रहा है। आलोचकों का कहना है कि “हमास नेताओं को निशाना बनाने” के नाम पर पूरी आबादी को सामूहिक सज़ा दी जा रही है।

United Nations, मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने नागरिकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई है।

मुख्य आरोप और घटनाएँ इस प्रकार हैं:

रिहायशी इलाकों पर भारी बमबारी, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत और विस्थापन हुआ।

अस्पतालों, स्कूलों, शरण शिविरों और राहत केंद्रों के आसपास हमलों के आरोप, जिससे स्वास्थ्य और राहत व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

बिजली, पानी, ईंधन और खाद्य आपूर्ति पर प्रतिबंध या नाकेबंदी, जिसके कारण मानवीय संकट गहरा गया।

बच्चों और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में नागरिक हताहत होने की रिपोर्टें।

ग़ाज़ा के बड़े हिस्सों में इमारतों, सड़कों और बुनियादी ढांचे का व्यापक विनाश।

राहत सामग्री पहुँचाने में कठिनाइयों और मानवीय सहायता पर बाधाओं के आरोप।

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