इज़रायल ने वेस्ट बैंक में अपने अधिकार बढ़ाने के उपायों को मंज़ूरी दी
इज़रायल की सुरक्षा कैबिनेट ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में अपने अधिकारों का विस्तार करने के लिए कई व्यापक उपायों को मंज़ूरी दे दी है। इज़रायल की सुरक्षा कैबिनेट द्वारा कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में अपने अधिकारों के विस्तार को मंज़ूरी देना अंतरराष्ट्रीय क़ानून और मानवीय मूल्यों पर सीधा हमला है। जिन उपायों को स्वीकृति दी गई है, वे न केवल फ़िलिस्तीनी जनता के मौलिक अधिकारों को और सीमित करते हैं, बल्कि क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को भी ख़तरनाक स्तर तक ले जाने की क्षमता रखते हैं।
फ़िलिस्तीनी ज़मीन को इज़रायली बसने वालों के लिए बिक्री को आसान बनाना और फ़िलिस्तीनी नियंत्रण वाले इलाक़ों में इज़रायली अधिकारियों की शक्तियों का विस्तार करना, वास्तव में ज़मीन पर ज़बरदस्ती किए जा रहे विलय की प्रक्रिया को औपचारिक रूप देता है।
फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा इस फ़ैसले को “ख़तरनाक और अवैध” बताया जाना पूरी तरह जायज़ है। यह कदम न केवल ओस्लो समझौतों की भावना के ख़िलाफ़ है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों की भी खुली अवहेलना है, जो वेस्ट बैंक को कब्ज़ा किया हुआ क्षेत्र मानते हैं। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की अपील इस बात को दर्शाती है कि फ़िलिस्तीनी नेतृत्व अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी को याद दिलाने के लिए मजबूर हो चुका है।
इस बीच, वेस्ट बैंक में इज़रायली बलों द्वारा कम से कम 20 फ़िलिस्तीनियों की गिरफ़्तारी, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, ज़मीनी हक़ीक़त की भयावह तस्वीर पेश करती है। नाबलुस, रामल्ला, हेब्रोन और जेनिन जैसे इलाक़ों में की गई ये कार्रवाइयां बताती हैं कि सुरक्षा के नाम पर सामूहिक दमन जारी है। बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के गिरफ़्तारियां और छापे आम नागरिकों के जीवन को असुरक्षित बना रहे हैं।
कुल मिलाकर, वेस्ट बैंक में इज़रायल के हालिया फ़ैसले शांति की किसी भी संभावना को और कमज़ोर करते हैं। जब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता, तब तक फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ती ही रहेगी।

