इराक़ ने फिर दोहराया, अपनी ज़मीन से किसी भी देश पर हमला नहीं होने देंगे
इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार क़ासिम अल-अराज़ी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इराक़ कभी भी अपनी धरती का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के ख़िलाफ़ सैन्य हमले के लिए नहीं होने देगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इराक क्षेत्रीय स्थिरता और संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी तरह के आक्रामक कृत्य का हिस्सा नहीं बनेगा।
यह बयान उस समय आया जब अल-अराज़ी ने कुवैत की खुफिया एजेंसी के प्रमुख मिशाल अल‑हौली से बगदाद में मुलाक़ात की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और आपसी सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
क़ासिम अल-अराज़ी ने कहा कि, इराक़ की नीति स्पष्ट है और वह चाहता है कि मध्य पूर्व के मौजूदा संकटों का समाधान युद्ध और टकराव के बजाय कूटनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण उपायों से निकाला जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्रीय देश समझदारी और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।
इराक़ी राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि इस मुलाक़ात में इराक़ और कुवैत के बीच अच्छे और ऐतिहासिक संबंधों को और मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि द्विपक्षीय सहयोग को राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक सभी स्तरों पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए ताकि यह दोनों देशों के साझा हितों की रक्षा कर सके।
अल‑अराज़ी ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ संयुक्त प्रयासों की अहमियत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इराक़, आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़े विदेशी नागरिकों को उनके मूल देशों में वापस भेजने के लिए पूरी कोशिश करेगा और इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
कुवैत के खुफिया प्रमुख मिशाल अल‑हौली ने भी इस बैठक में इराक के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर क्षेत्र को युद्ध, अस्थिरता और संघर्ष के फैलाव से बचाने के लिए काम कर रहे हैं।

