ईरान के राष्ट्रपति की कड़ी चेतावनी: सर्वोच्च नेता पर हमला हुआ तो ‘पूर्ण युद्ध’ होगा
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य या साज़िशनुमा कार्रवाई को ईरान पूरे देश के खिलाफ युद्ध मानेगा। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्र अपने नेतृत्व और संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा।
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी बयान में राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि वर्षों से लगाए जा रहे अमानवीय प्रतिबंध ईरानी जनता की आर्थिक परेशानियों की सबसे बड़ी वजह हैं। उनके मुताबिक, ये प्रतिबंध आम लोगों की ज़िंदगी को निशाना बना रहे हैं और इसी के ज़रिये ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले शनिवार को, सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने हालिया अशांति और हिंसा को लेकर सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि हाल के दंगों में विदेशी तत्वों की भूमिका रही और हत्याओं, तोड़फोड़ तथा झूठे आरोपों के पीछे अमेरिका की साज़िश है। अयातुल्लाह खामेनेई ने ट्रंप को “अपराधी” बताते हुए कहा कि ईरानी राष्ट्र के खिलाफ किए गए हर नुकसान की जवाबदेही उन्हीं पर आती है।
उसी दिन बाद में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी सख्त बयानबाज़ी दोहराई और इस्लामी गणराज्य के नेतृत्व को लेकर विवादित टिप्पणी की। अमेरिकी राजनीतिक मीडिया संस्थान POLITICO से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “अब ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है,” जिसे तेहरान ने खुली दखलअंदाज़ी करार दिया।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पिछले महीने के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन शुरुआत में शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में वे हिंसक हो गए। सरकारी बयान के अनुसार, इन घटनाओं को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उकसाने वाली बयानबाज़ी और उनकी खुफिया एजेंसियों के समर्थन से हवा मिली। आरोप है कि दंगाइयों ने कई ईरानी शहरों में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाया, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और अस्थिरता फैलाने की कोशिश की।
तेहरान ने दोहराया है कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा और देश की सुरक्षा व संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाएगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि दबाव, प्रतिबंध और धमकियों के बावजूद देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहेगा।

