ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई का ईरानी जनता से संवाद
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत के 40वें दिन के मौके पर। ईरानी जनता को संबोधित करते हुए कहा है कि, पिछले 40 दिनों की तरह जनता की मैदान में मौजूदगी लगातार बनी रहनी चाहिए।
आज और इस मुकाम तक “तीसरे पवित्र रक्षा (दिफ़ा-ए-मुक़द्दस)” की इस गाथा में पूरे भरोसे के साथ कहा जा सकता है कि आप ईरान की जनता ही असली विजेता रहे हैं।
इस्फंद 1404 (ईरानी कैलेंडर) एक नए दौर की शुरुआत है, जिसमें इस्लामी ईरान की ताकत उभरकर सामने आई है। हम ईरान के दक्षिणी पड़ोसियों से कहते हैं कि आप एक चमत्कार देख रहे हैं। इसलिए सही तरीके से देखें, सही समझें, सही जगह खड़े हों और शैतानी ताकतों के झूठे वादों पर भरोसा न करें।
अमेरिका के साथ बातचीत (मुज़ाक़रात) की खबर से यह नहीं समझना चाहिए कि अब सड़कों पर मौजूद रहने की ज़रूरत नहीं है।
अगर मान लें कि सैन्य क्षेत्र में कुछ समय के लिए खामोशी ज़रूरी हो जाए, तब भी जनता की जिम्मेदारी मैदानों और मस्जिदों में मौजूद रहने की और बढ़ जाती है।
मैदानों में आपकी आवाज़ें बातचीत के नतीजों को प्रभावित करती हैं। इसी तरह “जान-फ़िदा बराए ईरान” नामक बढ़ती हुई करोड़ों लोगों की मुहिम भी इस क्षेत्र में प्रभावी तत्वों में से एक है। इंशाअल्लाह, ईरान की जनता के सामने जो भविष्य है, वह एक शानदार और इज़्ज़त से भरे दौर के आने की खुशखबरी देता है।
जिन्होंने हमारे देश पर हमला किया है, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे
यह बात सभी को जान लेनी चाहिए कि हम निश्चित रूप से उन अपराधी आक्रमणकारियों को, जिन्होंने हमारे देश पर हमला किया है, नहीं छोड़ेंगे।
इस युद्ध में हुए हर नुकसान का मुआवज़ा लेंगे
हम अवश्य ही इस युद्ध में हुए हर नुकसान का मुआवज़ा, शहीदों के ख़ून का हक़ (ख़ून-बहा) और घायलों (जांबाज़ों) की दीयत (क्षतिपूर्ति) मांगेंगे।
हम निश्चित रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन को एक नए चरण में ले जाएंगे। हम पूरे “जबहा-ए-मुक़ावमत” (प्रतिरोध मोर्चे) को एकजुट रूप में देखते हैं। हम न तो युद्ध चाहते थे और न हैं, लेकिन अपने वैध अधिकारों से किसी भी हाल में पीछे नहीं हटेंगे।

