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ईरान की मिसाइल तकनीक हमारी सुरक्षा प्रणाली से आगे निकल गई है: इज़रायली अधिकारी

ईरान की मिसाइल तकनीक हमारी सुरक्षा प्रणाली से आगे निकल गई है: इज़रायली अधिकारी

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट और इज़रायली अधिकारियों के बयानों से साफ संकेत मिलता है कि, ईरान की उन्नत मिसाइल तकनीक अब पारंपरिक वायु-रक्षा प्रणालियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।

दो दिन पहले डिमोना और अराद जैसे संवेदनशील इलाकों में ईरानी मिसाइलों का सफलतापूर्वक पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि इज़रायल की “अभेद्य रक्षा” की छवि दरक गई है। इज़राइली सेना का यह स्वीकार करना कि उन्होंने कुछ घंटों के अंतराल में दागी गई दो ईरानी मिसाइलों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके।

एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी, जिसने अपना नाम उजागर नहीं किया, ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा: “हम ऐसी तकनीक से जूझ रहे हैं जिसकी गति और मार्ग हमारी पारंपरिक वायु-रक्षा प्रणालियों के पैटर्न से आगे निकल चुके हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने न सिर्फ मिसाइलों की गति और सटीकता बढ़ाई है, बल्कि “मैन्युवरेबल वारहेड” और बड़े पैमाने पर एक साथ हमले (सैचुरेशन अटैक) जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल कर इज़रायल की बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली को भ्रमित कर दिया है। यही कारण है कि अत्याधुनिक “एरो-3” जैसे सिस्टम भी हर मिसाइल को रोक पाने में विफल हो रहे हैं।

हाल की घटनाओं में यह भी सामने आया कि कुछ मिसाइलें इज़रायल की कई परतों वाली रक्षा प्रणाली को पार कर सीधे लक्ष्यों के पास जाकर गिरीं। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान ने न केवल तकनीकी बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी बढ़त हासिल कर ली है।

ईरान का दावा है कि ये हमले “जवाबी कार्रवाई” का हिस्सा हैं—क्योंकि पहले उसके परमाणु ठिकानों पर अमेरिका और इज़रायल द्वारा हमले किए गए थे। इस संदर्भ में ईरान अपनी सैन्य क्षमता को “निवारक शक्ति” (deterrence) के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, ताकि भविष्य में उस पर हमले करने से पहले विरोधी कई बार सोचें।

डिमोना जैसे अत्यंत संवेदनशील परमाणु केंद्र के पास मिसाइल का पहुंचना अपने आप में एक बड़ा रणनीतिक संदेश है—कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इज़राइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकाने भी अछूते नहीं रहेंगे।

कुल मिलाकर, इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल रहा है। जहां पहले इज़राइल की सैन्य श्रेष्ठता को चुनौती देना मुश्किल माना जाता था, वहीं अब ईरान अपनी तकनीकी प्रगति और रणनीतिक योजना के दम पर उसे सीधे चुनौती देता हुआ दिखाई दे रहा है।

यह खबर केवल एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का संकेत है—जहां ईरान अपनी मिसाइल क्षमता के जरिए न केवल जवाब दे रहा है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश भी कर रहा है।

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