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ईरान की सेना युद्ध की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है: अमेरिका

ईरान की सेना युद्ध की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है: अमेरिका

अमेरिकी अख़बार The New York Times की एक रिपोर्ट ने उस वास्तविकता की ओर संकेत किया है जिसे लंबे समय से छिपाने की कोशिश की जा रही थी। भले ही डोनाल्ड ट्रंप की सरकार यह दावा कर रही हो कि युद्ध में उसका पलड़ा भारी है, लेकिन स्वयं अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के बयान बताते हैं कि, ईरान की सेना युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुसार तेजी से अपनी रणनीतियाँ बदल रही है और लगातार मुकाबला कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त बमबारी के बावजूद ईरानी सेना ने केवल बचाव ही नहीं किया, बल्कि नई रणनीतियों के साथ जवाब भी दिया। अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपने संसाधनों का उपयोग बेहद सोच-समझकर किया है और दुश्मन की तकनीकी बढ़त के बावजूद प्रभावी तरीके से संघर्ष जारी रखा है।

संघर्ष शुरू होने के लगभग 11 दिनों के भीतर ही ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरानी बलों ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी वायु-रक्षा और रडार प्रणालियों को निशाना बनाकर यह दिखाया कि वह केवल रक्षात्मक स्थिति में नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से जवाब देने में भी सक्षम है।

कई विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने आधुनिक युद्ध की नई शैली अपनाई है—जहाँ कम संसाधनों के साथ भी अधिक प्रभाव पैदा किया जा सकता है। ड्रोन तकनीक, सटीक हमले और रणनीतिक लक्ष्यों को चुनकर हमला करना ऐसी रणनीतियाँ हैं जिनसे शक्तिशाली देशों की सैन्य योजनाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट कर दी है: आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की संख्या या तकनीक से नहीं जीते जाते, बल्कि रणनीतिक सोच, धैर्य और परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। कई विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने इसी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसने उसे एक कठिन संघर्ष में भी टिके रहने की ताकत दी है।

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