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ईरान के भविष्य का फ़ैसला ईरानी जनता को स्वयं करना चाहिए: फ़्रांस

ईरान के भविष्य का फ़ैसला ईरानी जनता को स्वयं करना चाहिए: फ़्रांस

फ़्रांस की सशस्त्र सेनाओं के मंत्री ने फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य हस्तक्षेप इस देश की प्राथमिक पसंद नहीं है। फ़ारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच फ़्रांस द्वारा दिया गया बयान एक अहम कूटनीतिक संकेत है।

फ़्रांस की सशस्त्र सेनाओं की मंत्री आलिस रूफ़ो ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य हस्तक्षेप फ़्रांस की प्राथमिक नीति नहीं है। यह बयान न केवल युद्ध की राजनीति से दूरी दर्शाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और कूटनीति की ज़रूरत को भी रेखांकित करता है।

‘ले ग्रां जूरी’ कार्यक्रम में बातचीत के दौरान रूफ़ो ने कहा कि ईरान के भविष्य का फ़ैसला ईरानी जनता को स्वयं करना चाहिए, न कि किसी बाहरी शक्ति को बलपूर्वक दख़ल देकर थोपना चाहिए। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय क़ानून, संप्रभुता और आत्मनिर्णय के सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने यह भी कहा कि हर संभव तरीके से ईरानी जनता का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन सैन्य रास्ता समाधान नहीं है।

ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की नीति न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाएगी, बल्कि मानवीय संकट को और गंभीर बना देगी। फ़्रांस का यह रुख़ इस बात की पुष्टि करता है कि समस्याओं का हल युद्ध नहीं, बल्कि संवाद, कूटनीति और राजनीतिक समाधान से निकलता है।

ईरान एक संप्रभु राष्ट्र है और उसे अपने आंतरिक मामलों पर स्वयं निर्णय लेने का अधिकार है। किसी भी देश के भविष्य को बाहर से तय करने की कोशिश लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय न्याय के मूल सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है।

फ़्रांस का यह बयान एक सकारात्मक संकेत है कि अब वैश्विक राजनीति में धीरे-धीरे सैन्य हस्तक्षेप की जगह राजनीतिक समाधान और जनसमर्थन आधारित दृष्टिकोण को महत्व दिया जा रहा है। ईरान के प्रति सम्मान, संवाद और सहयोग का रास्ता ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की वास्तविक कुंजी है।

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