ईरान का अमेरिका को स्पष्ट संदेश: धमकियों के साये में बातचीत संभव नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेश्कियान ने इराक़ के नए प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान अमेरिका और क्षेत्रीय हालात पर स्पष्ट रुख़ अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को यह संदेश दिया जाए कि वे पश्चिम एशिया में सैन्य धमकियों और तनाव का माहौल समाप्त करें। उन्होंने कहा कि शिया विचारधारा के मानने वालों को ज़ोर-जबरदस्ती और दबाव की भाषा से झुकाया नहीं जा सकता।
पेज़ेश्कियान ने कहा कि अमानवीय नीतियों और मानवाधिकारों के सिद्धांतों के विपरीत आचरण ने पूरे क्षेत्र को अशांति और अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। उनका कहना था कि जब तक ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व, देश की संप्रभुता और ईरानी जनता के प्रति विश्वास बहाल नहीं किया जाता, तब तक धमकियों के माहौल में किसी सार्थक वार्ता की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उन्होंने अमेरिका की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ़ अधिकतम दबाव की रणनीति अपनाता है, जबकि दूसरी ओर यह अपेक्षा करता है कि ईरान बातचीत की मेज़ पर आकर उसकी एकतरफ़ा शर्तों को स्वीकार कर ले। पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट कहा कि ऐसा समीकरण न तो व्यावहारिक है और न ही संभव।
ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अतीत में वार्ता के दौर के दौरान भी ईरान को दो बार हमलों का सामना करना पड़ा है, और अब जबकि संवाद का रास्ता खुला हुआ है, फिर से सैन्य गतिविधियाँ और धमकियाँ बढ़ाई जा रही हैं।
उन्होंने दोहराया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के दायरे में बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपने सिद्धांतों, आस्था और राष्ट्रीय सम्मान के साथ किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी के आगे झुकेगा नहीं। उनका कहना था कि यदि बातचीत तर्क और सम्मान के आधार पर हो, तो रास्ता निकल सकता है, लेकिन दबंगई और धमकी की भाषा से कोई समाधान नहीं निकलेगा।
अंत में पेज़ेश्कियान ने कहा कि वर्चस्ववादी सोच छोड़कर ईरानी जनता के अधिकारों और सम्मान का आदर किया जाना चाहिए।

