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ईरानी सुप्रीम लीडर ने अमेरिका-इस्राईल द्वारा युद्ध से हुए नुक़सान के मुआवज़े की मांग की

ईरानी सुप्रीम लीडर ने अमेरिका-इस्राईल द्वारा युद्ध से हुए नुक़सान के मुआवज़े की मांग की

इस्लामी क्रांति ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ख़ामेनेई ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई लड़ने तथा अमेरिका और इस्राईल की आक्रामकता से हुए नुक़सान के लिए देश के अधिकारों और मुआवज़े को हासिल करने के वास्ते ठोस प्रयास करने का आह्वान किया है। शनिवार को ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलाम-हुसैन मोहसिनी एज़ेई के साथ हुई बैठक में सुप्रीम लीडर ने यह मांग रखी।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि, न्यायपालिका को न्याय सुनिश्चित करके, जनता के अधिकारों की रक्षा करके, भ्रष्टाचार और उसे बढ़ावा देने वाली बाधाओं के ख़िलाफ़ प्रभावी कार्रवाई करके तथा मामलों का त्वरित, सटीक और निर्णायक ढंग से निपटारा करके इस्लामी व्यवस्था के प्रति जनता के विश्वास और समर्थन को मज़बूत करना चाहिए।

सुप्रीम लीडर ने न्यायपालिका में व्यापक और ठोस सुधारों की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने प्रमुख क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग, विशेष रूप से कानूनों के उचित कार्यान्वयन की निगरानी, तथा संगठनों और संस्थानों के कामकाज में सुधार लाने के लिए नियमित निरीक्षण किए जाने का आह्वान किया।

आयतुल्लाह मुजतबा ख़ामेनेई ने उन चूकों और लापरवाहियों की जांच करने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया, जिनसे आपराधिक दायित्व उत्पन्न होता है। उन्होंने अपराधों के ख़िलाफ़  निर्णायक लड़ाई लड़ने और उल्लंघनों को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को समाप्त करने के लिए संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

बैठक की शुरुआत में न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी एज़ेई ने अपने नए कार्यकाल के लिए न्यायपालिका की योजनाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें न्यायिक सुधार और रूपांतरण संबंधी दस्तावेज़ को अद्यतन करना तथा न्यायिक मामलों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज करना शामिल था।

इन पहलों का उद्देश्य मामलों के निपटारे में लगने वाला समय कम करना, लागत घटाना, अदालतों के फैसलों की शुद्धता सुनिश्चित करना और न्यायपालिका के कर्मचारियों की ईमानदारी एवं कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बेहतर बनाना है। यह बैठक आयतुल्लाह ख़ामेनेई और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ के बीच हुई मुलाक़ात के कुछ दिनों बाद हुई। उस बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इस्राईल द्वारा छेड़े गए सैन्य, आर्थिक और वैचारिक युद्ध के नवीनतम घटनाक्रमों पर चर्चा की गई थी।

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