मीनाब स्कूल पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की बाद ईरानी रक्षा मंत्रालय का बयान
इस्लामी गणराज्य ईरान के रक्षा मंत्रालय ने तीसरे दौर की वार्ताओं के दौरान हमारे ईरान पर किए गए ज़ायोनी शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बर्बर और आपराधिक हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह हमला एक बार फिर साबित करता है कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय क़ानून और शांति की किसी भी अवधारणा के प्रति न तो प्रतिबद्ध हैं और न ही ईमानदार।
इन हमलों के साथ-साथ मीनाब पर अमेरिकी आक्रमण में निर्दोष छात्राओं की शहादत ने दुनिया के ज़मीर को झकझोर कर रख दिया है। बच्चों, छात्रों और आम नागरिकों को निशाना बनाना अमेरिका और ज़ायोनी शासन की कोई आकस्मिक नीति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक और सैन्य डीएनए का अभिन्न हिस्सा है। शिक्षा संस्थानों, रिहायशी इलाकों और मासूम लोगों पर हमले यह स्पष्ट करते हैं कि ये ताक़तें अपने वर्चस्ववादी हितों के लिए किसी भी हद तक गिर सकती हैं।
यह आक्रमण न केवल अमेरिका की रणनीतिक विफलताओं को और उजागर करेगा, बल्कि कब्ज़े वाले क़ुद्स के ज़ायोनी शासन, अर्थात् इज़रायल, की अस्थिरता और पतन की प्रक्रिया को भी तेज़ करेगा। ऐसे कृत्य इन शक्तियों को सुरक्षा नहीं, बल्कि और अधिक अंतरराष्ट्रीय घृणा और अलगाव की ओर ले जा रहे हैं।
ईरान की सशस्त्र सेनाएँ, देश की एकजुट, साहसी और जागरूक जनता के पूर्ण समर्थन के साथ, इन अपराधों के विरुद्ध सशक्त, निर्णायक और पछतावा कराने वाली प्रतिक्रिया को जारी रखेंगी। जैसा कि सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट किया है, राष्ट्र की संप्रभुता, सुरक्षा और शहीदों के रक्त का प्रतिशोध अनिवार्य है।
रक्षा मंत्रालय यह भी स्पष्ट करता है कि वह पहले की तरह अपने बहादुर रणबाँकों को पूर्ण सैन्य और तकनीकी समर्थन देता रहेगा, ताकि “वादा-ए-सादिक़ 4” जैसे अभियानों के माध्यम से दुश्मनों की साज़िशों को नाकाम किया जा सके और उत्पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

