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ईरान और अमेरिका के संबंध बेहद निर्णायक दौर में

ईरान और अमेरिका के संबंध बेहद निर्णायक दौर में अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के निदेशक राफेल ग्रोसी ने ईरान और अमेरिका के संबंधों को लेकर बेहद गंभीर बयान दिया है।

ईरान और अमेरिका के संबंधों को बेहद संवेदनशील मोड पर बताते हुए राफेल ग्रोसी ने कहा कि ईरान और अमेरिका बहुत ही संवेदनशील मोड़ पर खड़े हुए हैं। वह उस स्थिति में है जहां परमाणु समझौते को या तो फिर से जीवित किया जा सकता है या यह समझौता पूरी तरह खत्म हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि अगले कुछ सप्ताह बेहद अहम साबित होंगे। यह अवधि तय करेगी कि ईरान और अमेरिका अप्रत्यक्ष वार्ता की मेज पर लौट सकते हैं या नहीं। यह अगले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो जाएगा।

राफेल ग्रोसी ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें अगले कुछ दिनों में तेहरान यात्रा का निमंत्रण दिया है ताकि वह ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर सके। उन्होंने कहा कि उनके कार्यक्रम में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी पर विराम सहित अन्य मुद्दे भी हैं अगर वह हल नहीं होते तो इस समझौते में वापसी नामुमकिन होगी। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी के लिए किसी समझौते तक पहुंचना बेहद कठिन काम है।

याद रहे कि नवंबर के मध्य में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक के समय तक इस समझौते वार्ता में लौटने की समय सीमा निर्धारित की गई है। यूरोपीय देशों ने बार-बार ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि वह अगर इस समझौते का पालन नहीं करता है तो ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

परमाणु समझौते में अमेरिका की वापसी और ईरान की ओर से फिर से समझौते को पूर्णरूप से लागू करने के लिए 6 दौर की वार्ता के बाद तेहरान वार्ता से हट गया था। ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने कहा था कि वे चाहते हैं इस समझौते पर एक बार फिर से निगाह डालें।

ईरान सरकार ने कहा है कि वह जल्द ही वार्ता की मेज पर पलटेगी लेकिन अभी तक किसी तिथि की घोषणा नहीं की गई है। प्राथमिक समझौते के अनुसार ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन की तय सीमा पर सहमति जताते हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी को भी स्वीकार करने पर सहमति जताई थी।

ईरान लगातार इस बात को कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है जबकि अमेरिका बार-बार कहता रहा है कि ईरान अगले कुछ महीनों में परमाणु बम बनाने में सक्षम होगा। ईरान एवं विश्व शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते से 2018 में अमेरिका एक पक्षीय रूप से निकल गया था। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे एक बुरा समझौता बताते हुए कहा था कि ओबामा प्रशासन ने एक घटिया समझौता किया था।

आई मॉनिटर 24 की रिपोर्ट के अनुसार ईरान से समझौते के बाद हालांकि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटा लिए गए थे लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध बदस्तूर जारी रहे बल्कि ट्रंप ने सैकड़ों प्रतिबंध और थोंप दिए थे जिसकी वजह से ईरान को भारी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ा।

अमेरिका के समझौते से निकलने के साल भर बाद ईरान ने भी धीरे-धीरे समझौते के वचनों की अनदेखी शुरू कर दी थी। अमेरिका में बाइडन प्रशासन के सत्ता में आने के साथ ही एक बार फिर अमेरिका ने इस समझौते में वापसी की इच्छा जताई है जिसे लेकर विएना में कई दौर की वार्ता हो चुकी है।

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