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ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता और नेतन्याहू की शर्तें

ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता और नेतन्याहू की शर्तें

हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मीडिया और पश्चिमी नेताओं के बयानों में इसे अक्सर केवल “ईरान के “परमाणु कार्यक्रम” की सुरक्षा को लेकर एक तकनीकी बहस के रूप में पेश किया जाता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी परमाणु वार्ता का असली उद्देश्य इस्लामी गणराज्य के शांतिपूर्ण अधिकारों पर समझौता करना नहीं है, बल्कि कुछ बाहरी ताक़तें अपनी राजनीतिक इच्छाओं को थोपना चाहती हैं। स्थिति यह है कि ईरान आत्मरक्षा और अपनी संप्रभुता के साथ बातचीत कर रहा है, जबकि इज़रायल ख़ुद को मध्य पूर्व में दबदबा बनाए रखने की कोशिश में असल मुद्दों को बिगाड़ रहा है।

इज़रायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि,यदि कोई समझौता होना है, तो उसमें कई अहम बिंदु शामिल होने चाहिए। ऐसे बिंदु जिन्हें हम न केवल इज़रायल की सुरक्षा के लिए, बल्कि दुनिया, अमेरिका और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी मानते हैं।

पहला: समस्त समृद्ध (एनरिच्ड) परमाणु सामग्री को ईरान की धरती से बाहर ले जाया जाए।

दूसरा: ईरान के पास किसी भी प्रकार की यूरेनियम संवर्धन क्षमता शेष नहीं रहनी चाहिए। इसका मतलब केवल संवर्धन प्रक्रिया को रोकना नहीं, बल्कि उन सभी उपकरणों और बुनियादी ढांचे को भी हटाना है जो संवर्धन की अनुमति देते हैं।

तीसरा: ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता 300 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए और ईरान को इसका पालन करना होगा।

चौथा: उस तथाकथित “प्रतिरोध धुरी” (एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस) को खत्म किया जाए, जिसे ईरान ने स्थापित किया है।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से नष्ट करने का दबाव अनैतिक
ईरान ने हमेशा स्पष्ट किया है कि उसका नागरिक परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के दायरे में है। पश्चिमी पक्ष के दावे कि “सम्पूर्ण समृद्ध सामग्री को बाहर निकालना चाहिए” वास्तविक सुरक्षा चिंताओं को दरकिनार करके ईरान की तकनीकी प्रगति को अनावश्यक रूप से निष्क्रिय करने की रणनीति है।

मिसाइल कार्यक्रम की सीमा 300 किमी करने की मांग तर्कहीन
हर देश को आत्मरक्षा का अधिकार है, और ईरानी मिसाइल कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में किसी आक्रामक कार्रवाई नहीं करना, बल्कि संभावित खतरे से निपटने की क्षमता रखना है। ऐसी असमान शर्तें केवल ईरान को कमजोर करने और क्षेत्रीय सामरिक संतुलन को बिगाड़ने के लिए लगाई जा रही हैं।

“प्रतिकिरोध धुरी” ख़त्म करने की मांग,वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों की अनदेखी
“प्रतिकिरोध धुरी” (Axis of Resistance) को खत्म करने की बात ईरान की वास्तविक सुरक्षा चुनौतियों को अनदेखा करती है। यह नेटवर्क उन देशों और समूहों का सुरक्षा अवलम्बन है जो बाहरी आक्रमण, असमान शक्ति और हस्तक्षेप के खिलाफ़ खड़े हैं। उसे “बहाल करने” की मांग ईरान विरोधी रवैये का हिस्सा है, न कि असली समाधान।

इज़रायली हस्तक्षेप, वार्ता को बाधित करने की कोशिश
इज़रायल का हस्तक्षेप को प्रभावी रूप से बाधित कर रहा है। यह देश, खुद Middle East में स्थिरता का बड़ा कारण रहा है, उन वार्ताओं को उलझाने की कोशिश कर रहा है जिन्हें शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ाया जाना चाहिए। अमेरिका के साथ इज़रायल की नज़दीकी घटती नहीं, बल्कि कई मामलों में संघर्ष और विवाद की वजह बन रही है।

निष्पक्ष और संतुलित समाधान की आवश्यकता
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता का असली उद्देश्य शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना होना चाहिए। यह केवल तकनीकी और वैज्ञानिक मुद्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए। ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों का सम्मान करना, उसके मिसाइल कार्यक्रम की वास्तविक जरूरतों को समझना, और “प्रतिरोध धुरी” जैसे सुरक्षा नेटवर्क को समाप्त करने की मांगों से दूर रहना आवश्यक है।

एक संतुलित और निष्पक्ष समाधान तभी संभव है जब वार्ता में वास्तविक सुरक्षा चिंताओं को महत्व दिया जाए और असमान शर्तों से बचा जाए। ईरान ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अपनी संप्रभुता और आत्मरक्षा के अधिकारों की रक्षा भी करेगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह समझना जरूरी है कि केवल एक पक्ष के दबाव में तैयार किए गए समझौते दीर्घकालिक समाधान नहीं ला सकते। शांति और स्थिरता तभी संभव है जब सभी पक्ष वास्तविक मुद्दों पर खुली और ईमानदार बातचीत करें, और किसी भी देश की वैज्ञानिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षमताओं को निष्क्रिय करने के प्रयास न हों। ईरान ने बार-बार साबित किया है कि वह जिम्मेदार और शांतिपूर्ण राष्ट्र है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है। उसके अधिकारों का सम्मान और उसकी सुरक्षा आवश्यक है, न कि उसे कमजोर करने की रणनीतियाँ अपनाना। असली

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए IscPress उत्तरदायी नहीं है।

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