ईरान सम्मान का जवाब सम्मान से देता है, लेकिन धमकी स्वीकार नहीं करता: पेज़ेश्कियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ईरान-अमेरिका संबंधों पर बात करते हुए साफ संदेश दिया है कि तेहरान बातचीत से भागता नहीं है, लेकिन धमकी और दबाव की भाषा उसे मंज़ूर नहीं। उनके मुताबिक, हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच जो बातचीत हुई, वह एक सकारात्मक और रचनात्मक कदम है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया पहले ही तनाव से भरा हुआ है।
मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह वार्ता क्षेत्र के मित्र देशों की मध्यस्थता और प्रयासों के कारण संभव हो सकी। यानी यह कोई अचानक हुआ चमत्कार नहीं था, बल्कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक मेहनत चल रही थी। उन्होंने इसे “आगे की ओर बढ़ाया गया एक कदम” बताया और संकेत दिया कि यदि माहौल सम्मानजनक रहा, तो संवाद की गुंजाइश बनी रहेगी।
पेज़ेश्कियान ने ज़ोर देकर कहा कि संवाद और बातचीत ईरान की पुरानी नीति रही है, और विवादों को सुलझाने का यही सबसे बेहतर और शांतिपूर्ण रास्ता है। उनका कहना था कि ईरान कभी भी बातचीत का विरोधी नहीं रहा, लेकिन वह ऐसी बातचीत नहीं करेगा जिसमें शर्तें थोपने या दबाव बनाने की कोशिश की जाए।
परमाणु मुद्दे पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने ईरान का रुख एक बार फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु नीति पूरी तरह से परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के दायरे में है और देश अपने कानूनी और वैध अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगियों को संकेत देता है कि ईरान किसी “एकतरफा समझौते” या दबाव में लिए गए फैसलों को स्वीकार नहीं करेगा।
अपने बयान के अंत में पेज़ेश्कियान ने वही बात दोहराई जो ईरानी नेतृत्व वर्षों से कहता आया है: ईरानी राष्ट्र सम्मान का जवाब सम्मान से देता है, लेकिन धमकी, प्रतिबंध और ज़ोर-ज़बरदस्ती की भाषा उसे न पहले स्वीकार थी, न अब है।

