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ईरान ने तीन दौर की बातचीत की, हर बार जंग हुई; परमाणु मुद्दा केवल बहाना: अराक़ची

ईरान ने तीन दौर की बातचीत की, हर बार जंग हुई; परमाणु मुद्दा केवल बहाना: अराक़ची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए ईरान ने सात दिनों की एक पहल पेश की है। उनके अनुसार, यदि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों को स्वीकार करके उन्हें लागू करता है, तो छठे दिन जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है।

अब्बास इराक़ची ने इराक़ के समाचार चैनल अल-अख़बारिया के साथ एक विस्तृत साक्षात्कार में क्षेत्रीय मुद्दों पर बात की। उन्होंने अमेरिका के साथ मध्यस्थ देशों के ज़रिये अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रखने की पुष्टि की।

अराक़ची ने कहा कि, उनका देश किसी भी नए युद्ध का सामना करने के लिए अपनी सैन्य तैयारियाँ बनाए रखते हुए कूटनीति का रास्ता भी खुला रखे हुए है। अराक़ची ने कहा कि, अमेरिकी पक्ष ने सामने रखी गई शर्तों पर अपनी सहमति जताई है, लेकिन उसने कुछ अन्य शर्तें भी रखी हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उन शर्तों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

उनके अनुसार, ईरान की माँगें मुख्य रूप से सुरक्षा और आर्थिक मामलों से संबंधित हैं। इन मुद्दों पर पहले भी बातचीत के विभिन्न दौरों में चर्चा हो चुकी है। ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि, तेहरान की मुख्य माँग यह है कि अमेरिका इस्लामाबाद समझौता-ज्ञापन में शामिल अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करे।

उन्होंने कहा कि इन प्रतिबद्धताओं के लागू होने के बाद ही अन्य मुद्दों पर बातचीत शुरू की जा सकती है। इसके बाद दोनों पक्ष सभी विवादित मामलों पर चर्चा करते हुए एक व्यापक समझौते तक पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं।

सात दिनों की पहल कूटनीति का रास्ता खुला रखने के लिए है: अराक़ची

अमेरिका के प्रति अविश्वास के बावजूद नई पहल पेश करने के कारण के बारे में पूछे जाने पर अराक़ची ने कहा कि, ईरान अब तक वॉशिंगटन के साथ बातचीत के तीन दौरों का अनुभव कर चुका है और तीनों ही बार बातचीत के दौरान ईरान के खिलाफ युद्ध छिड़ गया।

उन्होंने आगे कहा कि तीसरे दौर की बातचीत में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कुछ समझ बनी थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने केवल दो सप्ताह तक उन समझौतों का पालन किया और फिर अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया। ईरान के विदेश मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि इन अनुभवों ने वॉशिंगटन की प्रतिबद्धताओं के प्रति तेहरान के अविश्वास को और मज़बूत किया है।

हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सात दिनों की पहल पेश करने का अर्थ कूटनीति से पीछे हटना नहीं है। इसका उद्देश्य बातचीत का रास्ता खुला रखना और दूसरे पक्ष को पहले हुए समझौतों का पालन करने की आवश्यकता याद दिलाना है।

कूटनीति के दरवाज़े खुले हैं, बातचीत की मेज़ अब भी उपलब्ध

अराक़ची ने कहा, “कूटनीति के दरवाज़े खुले हैं और बातचीत की मेज़ अब भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह समझना चाहिए कि कूटनीति की प्रक्रिया में बाधा ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका डाल रहा है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यदि वॉशिंगटन वास्तव में समझौता करने के लिए गंभीर है, तो उसे उन प्रतिबद्धताओं और शर्तों को लागू करना चाहिए जिन्हें वह पहले स्वीकार कर चुका है। ऐसा होने पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए बातचीत के नए दौर आयोजित करने का रास्ता खुल सकता है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य से इराक़ी जहाज़ों की आवाजाही

अब्बास अराक़ची ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रतिबंधों से इराक़ सहित क्षेत्रीय देशों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ईरान इस नुकसान को कम करने के लिए इराक़ी जहाज़ों को विशेष समुद्री मार्ग उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है।

अराक़ची के अनुसार, ईरान और ओमान जहाज़ों के प्रवेश और निकास के लिए निर्धारित मार्गों पर सहमत हो चुके हैं। इनके नक्शे और भौगोलिक निर्देशांक तैयार हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) में पंजीकृत किया जाना चाहिए। हालाँकि, जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना अमेरिका और ईरान के बीच राजनीतिक सहमति पर निर्भर है।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इस्राईल के हमलों के बाद समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है तथा जहाज़ों की सुरक्षा को गंभीर खतरे हैं। अराक़ची ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध में अपने उद्देश्य हासिल करने में विफल रहा है। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों की आलोचना करते हुए विवाद सुलझाने के लिए कूटनीति को बेहतर विकल्प बताया।

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