ईरान पर हमले में 5 क्षेत्रीय देशों की भागीदारी
मंगलवार शाम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में उन रिपोर्टों की पुष्टि की, जिनमें कहा गया था कि, सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए अमेरिका को संदेश भेजे थे। ट्रंप के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस संघर्ष में अमेरिका के साथ खड़े हैं और सहयोग कर रहे हैं।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई, लेकिन लगभग दो दिन बीत जाने के बावजूद सऊदी अरब की ओर से इस दावे का कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया, जिससे अटकलों को और बल मिला।
इसी बीच, बुधवार को अमेरिका में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राजदूत ने प्रतिष्ठित अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख लिखकर ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इज़रायली हमलों का समर्थन किया। इस लेख को क्षेत्रीय देशों के राजनीतिक रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
फार्स न्यूज़ एजेंसी से जुड़े एक खुफिया सूत्र के अनुसार, कुवैत, बहरीन, क़तर, यूएई और सऊदी अरब सहित कुल 5 देशों ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को सहयोग दिया। दावा किया गया है कि इन देशों ने अपने हवाई क्षेत्र, समुद्री मार्ग, जमीन और सैन्य ठिकानों को अमेरिकी सेना के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन सुविधाओं का इस्तेमाल केवल सैन्य अड्डों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई बार हमले इन देशों की सीमा के अन्य हिस्सों—जैसे हवाई क्षेत्र और समुद्री इलाकों—से भी किए गए। इससे यह संकेत मिलता है कि सहयोग व्यापक और बहु-आयामी था।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है और संबंधित देशों की ओर से इस पर कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। इसलिए इन रिपोर्टों को सावधानी से देखना आवश्यक है।

