हिज़्बुल्लाह के गोरिल्ला युद्ध और ड्रोन हमलों ने हमें जकड़ लिया है: इज़रायली अधिकारी
दक्षिणी लेबनान में जारी टकराव ने यह दिखा दिया है कि, आधुनिक युद्ध केवल उन्नत लड़ाकू विमानों, भारी बमबारी और अत्याधुनिक हथियारों के सहारे नहीं जीता जा सकता। ज़मीनी हालात, स्थानीय भूगोल की समझ, छोटे और तेज़ हमले, तथा ड्रोन जैसी तकनीकों का प्रभाव भी निर्णायक बनता जा रहा है।
अतिक्रमणकारी सेना के सैनिकों ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि दक्षिणी लेबनान में इस सेना के उन्नत हथियार और आधुनिक लड़ाकू विमान, हिज़्बुल्लाह के गोरिल्ला युद्ध और ड्रोन हमलों के सामने प्रभावहीन साबित हो रहे हैं।
इज़रायली अधिकारियों ने माना है कि दक्षिणी लेबनान की स्थिति उनके लिए “रणनीतिक कमजोरी का बिंदु” बन सकती है। इन अधिकारियों के अनुसार, तथाकथित “सुरक्षा घेरा” मजबूत किए जाने के बावजूद, अब कोई भी दैनिक सैन्य अभियान पूरी स्वतंत्रता के साथ नहीं चलाया जा सकता और सेना फिलहाल केवल रक्षात्मक गतिविधियों पर केंद्रित है।
उन्होंने यह भी ज़ोर देकर कहा कि, हिज़्बुल्लाह (Hezbollah) पूरी ताकत के साथ गुरिल्ला युद्ध, ड्रोन, अप्रत्यक्ष गोलाबारी और टैंक-रोधी मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। यदि यही स्थिति जारी रही, तो इज़रायली सेना को मैदान में पीछे हटने और सामरिक पिछड़ापन झेलना पड़ सकता है।
इज़रायली अधिकारियों के बयानों से यह संकेत मिलता है कि दक्षिणी लेबनान का मोर्चा उनके लिए लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। कथित “सुरक्षा घेरा” मज़बूत करने के बावजूद सेना को पूर्ण सैन्य स्वतंत्रता नहीं मिल पा रही है और उसे अधिकतर रक्षात्मक रणनीति अपनानी पड़ रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सीमावर्ती इलाकों में असमान युद्ध (asymmetric warfare) पारंपरिक सेनाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

