हिज़्बुल्लाह ने उम्मीद से कहीं ज़्यादा तेज़ी से खुद को फिर से संगठित किया: इज़रायली अख़बार
इज़रायल के प्रमुख अख़बार “हाआरेत्ज़” की रिपोर्ट ने एक अहम वास्तविकता को उजागर किया है—कि तमाम सैन्य दबाव और हमलों के बावजूद हिज़्बुल्लाह ने अपेक्षा से कहीं अधिक तेज़ी से अपनी ताक़त को फिर से खड़ा कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस संगठन ने न केवल अपने हथियार उत्पादन तंत्र को बहाल किया, बल्कि अपने कमांड और कंट्रोल सिस्टम को भी प्रभावी ढंग से पुनर्गठित किया।
इज़रायली जनरल एयाल ज़मीर का यह स्वीकार करना कि 2024 के युद्ध के बाद हिज़्बुल्लाह को कमजोर करने के बजाय वह और अधिक संगठित और मज़बूत होकर उभरा है, यह दिखाता है कि ज़मीनी हकीकत इज़रायली दावों से अलग है। यह भी संकेत मिलता है कि यह संगठन केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक क्षमता और रणनीतिक लचीलापन भी रखता है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नवंबर 2024 के युद्ध-विराम के बाद भी इज़रायल ने लगातार सैन्य कार्रवाइयाँ जारी रखीं, ताकि हिज़्बुल्लाह को दोबारा उभरने से रोका जा सके। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद, हिज़्बुल्लाह का तेज़ी से पुनर्निर्माण इस बात की ओर इशारा करता है कि बाहरी दबाव उसके ढांचे को स्थायी रूप से कमजोर नहीं कर सका।
“हाआरेत्ज़” के अनुसार, इज़रायली सेना ने उस समय हिज़्बुल्लाह के खिलाफ एक बड़े और केंद्रित सैन्य अभियान का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व ने इसे मंज़ूरी नहीं दी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इज़रायल के भीतर ही इस मुद्दे पर मतभेद मौजूद हैं, जबकि दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह अपने पुनर्गठन और रणनीतिक तैयारी में लगातार आगे बढ़ता रहा।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि क्षेत्रीय समीकरण केवल सैन्य कार्रवाइयों से तय नहीं होते, बल्कि संगठनों की आंतरिक क्षमता, समर्थन आधार और दीर्घकालिक रणनीति भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

