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हिज़्बुल्लाह ने 10 इज़रायली मर्कावा टैंकों को नष्ट करने का दावा किया 

हिज़्बुल्लाह ने 10 इज़रायली मर्कावा टैंकों को नष्ट करने का दावा किया 

दक्षिणी लेबनान के अल-तैयबा–अल-कंतरा क्षेत्र में कथित तौर पर हिज़्बुल्लाह ने दो अलग-अलग घात (ambush) अभियानों को अंजाम देने का दावा किया है। हिज़्बुल्लाह के “इस्लामी प्रतिरोध ऑपरेशन रूम” के अनुसार, इज़रायली सेना की गतिविधियों पर पहले से निगरानी रखी जा रही थी। जब इज़रायली बलों ने एक रिमोट-नियंत्रित बुलडोज़र को आगे बढ़ाया, तो उसे प्रतिरोध की संभावित स्थितियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

हिज़्बुल्लाह के दावे के मुताबिक, उनके लड़ाकों ने तुरंत हमला करने के बजाय धैर्यपूर्वक स्थिति का आकलन किया और इज़रायली यूनिट को अधिक अंदर आने दिया, ताकि उन्हें एक “सटीक और योजनाबद्ध घात” में फंसाया जा सके। जैसे ही इज़रायली टैंक और सैन्य वाहन तय क्षेत्र में पहुंचे, पहले से तैयार किए गए हथियारों—जिनमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) और अन्य विस्फोटक शामिल हो सकते हैं—का इस्तेमाल कर हमला किया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में मर्कावा टैंकों को निशाना बनाया गया, जो इज़रायल की सबसे उन्नत टैंक प्रणालियों में गिने जाते हैं। हिज़्बुल्लाह का दावा है कि इस ऑपरेशन में 10 टैंक नष्ट या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। हालांकि, इज़रायली सेना आमतौर पर अपने नुकसान के आंकड़े सीमित रूप में ही साझा करता है।

इस तरह की घात रणनीति (ambush tactics) में आम तौर पर इलाके की भौगोलिक समझ, पहले से छिपे हुए हथियारों की तैनाती, और दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार निगरानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दक्षिणी लेबनान का इलाका—जहां पहाड़ी और संकरी सड़कों का मिश्रण है—ऐसे अभियानों के लिए अनुकूल माना जाता है।

यह घटना क्षेत्र में चल रहे व्यापक तनाव और संघर्ष की पृष्ठभूमि में देखी जा रही है, जहां दोनों पक्ष समय-समय पर सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई करते रहते हैं। साथ ही, ऐसी खबरों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि युद्ध के दौरान आने वाली सूचनाएं अक्सर एक पक्ष के दावों पर आधारित होती हैं और पूरी तस्वीर बाद में ही स्पष्ट हो पाती है।

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