हर्ज़ोग, इज़रायल के राष्ट्रपति पद के योग्य नहीं: बेन गवीर
फ़िलिस्तीन के क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों के बसने वालों की बढ़ती हिंसा को लेकर इज़रायली सत्ता के भीतर खुला टकराव सामने आ गया है। इज़रायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग द्वारा बसने वालों की हिंसा की आलोचना किए जाने के बाद आंतरिक सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने उन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हर्ज़ोग राष्ट्रपति पद के योग्य नहीं हैं।
अल-अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बेन गवीर की नीतियों और उनके समर्थक उग्रवादियों को लेकर इज़रायल के भीतर और बाहर आलोचनाएँ तेज़ हो गई हैं। खास तौर पर “ग्लोबल समूद फ़्लीट” के कार्यकर्ताओं के साथ सुरक्षा बलों के व्यवहार और पश्चिमी तट में बसने वालों को मिली खुली छूट पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति हर्ज़ोग ने अपने बयान में कहा कि इज़रायल इस समय “भयावह हिंसा की लहर” का सामना कर रहा है, जिसे पश्चिमी तट में सक्रिय अराजक और कट्टरपंथी समूह अंजाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कई वरिष्ठ अधिकारियों को अपना अधिकांश समय इन हिंसक तत्वों और उपद्रवियों से निपटने में लगाना पड़ रहा है। हर्ज़ोग ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रकार की बर्बरता और कानून तोड़ने वालों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए।
हर्ज़ोग के इन बयानों को दक्षिणपंथी नेताओं और यहूदी बसने वालों पर सीधा हमला माना जा रहा है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए बेन गवीर ने राष्ट्रपति पर निशाना साधा और कहा कि “जो राष्ट्रपति लाखों इज़रायलियों को जंगली कहे, वह राष्ट्रपति पद के योग्य नहीं हो सकता।” उन्होंने दावा किया कि हर्ज़ोग अपने ही नागरिकों का अपमान कर रहे हैं और पश्चिमी तट में रहने वाले यहूदियों को बदनाम किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयानबाज़ी इज़रायल के भीतर बढ़ती वैचारिक और राजनीतिक दरार को उजागर करती है। एक ओर कट्टर दक्षिणपंथी मंत्री पश्चिमी तट में और अधिक सख़्त कार्रवाई तथा बस्तियों के विस्तार की वकालत कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर सुरक्षा और राजनीतिक हलकों का एक वर्ग लगातार बढ़ती हिंसा और उससे पैदा हो रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को लेकर चिंतित दिखाई दे रहा है।

