इस्राईल के ख़िलाफ़ बढ़ते प्रतिबंध भविष्य में उसके लिए अस्तित्वगत ख़तरा बन सकते हैं: ‘इज़राइल हयोम’
यहूदी जन नीति संस्थान (Jewish People Policy Institute) के महानिदेशक शौकी फ्रीडमैन ने इस्राईली अख़बार ‘इज़राइल हयोम’ में प्रकाशित लेख में चेतावनी दी है कि इस्राईल के ख़िलाफ़ बढ़ते प्रतिबंध भविष्य में उसके लिए अस्तित्वगत ख़तरा बन सकते हैं। उनके अनुसार, संस्थान के डेटाबेस में अक्टूबर की शुरुआत तक 62 देशों द्वारा उठाए गए 121 दंडात्मक कदम दर्ज किए गए, जिनमें से 93 अब भी लागू हैं।
पिछले चार वर्षों में लगाए गए इन प्रतिबंधों का दायरा वित्तीय गतिविधियों, हथियारों की बिक्री, व्यापार और अकादमिक शोध तक फैल चुका है। फ्रीडमैन ने बताया कि आयरलैंड और लक्ज़मबर्ग ने यूरोपीय संघ में इस्राईली बॉन्ड जारी करने में सहायता देने से इनकार किया, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने पश्चिमी तट में सक्रिय कंपनियों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए। नीदरलैंड ने भी पश्चिमी तट और गोलान क्षेत्र के उत्पादों के आयात पर रोक लगाई।
फ्रीडमैन के मुताबिक, इस्राईल के लिए सबसे गंभीर ख़तरा उसके रक्षा उद्योग पर पड़ सकता है, क्योंकि हथियार प्रणालियों के निर्माण में विदेशी पुर्ज़ों और तकनीक की अहम भूमिका है। यदि इलेक्ट्रॉनिक चिप जैसे दोहरे उपयोग वाले उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए गए, तो हथियारों का उत्पादन कठिन हो सकता है। अकादमिक प्रतिबंध भी इस्राईली शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक गतिविधियो को प्रभावित कर रहे हैं।
लेख में प्रतिबंधों के बढ़ने के प्रमुख कारणों में ग़ाज़ा युद्ध और पश्चिमी तट में इस्राईली सरकार की नीतियों को शामिल किया गया है। इनमें बस्तियों का विस्तार, अवैध चौकियों को मान्यता देना और फ़िलिस्तीनियों पर यहूदी चरमपंथियों के हमलों के मामलों में क़ानून लागू करने की कथित विफलता शामिल है।
फ्रीडमैन ने चेताया कि प्रतिबंधों का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यूरोपीय आयातक इस्राईली उत्पादों से दूरी बना सकते हैं और निवेशक अपना पैसा दूसरे देशों में स्थानांतरित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक जर्मनी और अमेरिका ने कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को रोकने में भूमिका निभाई है, लेकिन भविष्य में उनका रुख़ बदल सकता है। अमेरिकी सांसदों की ओर से हथियारों की बिक्री और सहायता सीमित करने की पहल भी चिंता का विषय है।
फ्रीडमैन ने प्रतिबंधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय तंत्र बनाने और मौजूदा प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने की अपील की। हालांकि, उन्होंने ज़ोर दिया कि पश्चिमी तट में नीतिगत बदलाव और क़ानून का प्रभावी क्रियान्वयन किए बिना इज़राइल का अंतरराष्ट्रीय अलगाव बढ़ सकता है।

