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गोर्बाचोव ने माना, सोवियत यूनियन को बचाया जा सकता था

गोर्बाचोव ने माना, सोवियत यूनियन को बचाया जा सकता था सोवियत यूनियन के पतन के लिए सोवियत समाजवादी संघ के समर्थकों द्वारा दोषी ठहराए जाने वाले मिखाइल गोर्बाचोव ने सोवियत यूनियन की आंतरिक समस्याओं के बारे में एक नया बयान जारी किया है।

90 वर्षीय मिखाइल गोर्बाचोव ने सोवियत यूनियन के पतन की 30वीं वर्षगांठ पर एक रूसी मीडिया आउटलेट से बात चीत की । यूएसएसआर के अंतिम नेता, जो 1985 से 1991 तक यूएसएसआर कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव थे ने दिसंबर 1991 में “अगस्त तख्तापलट” नामक आंतरिक तख्तापलट के बाद इस्तीफा दे दिया था और सोवियत संघ का पतन हो गया था।

टास समाचार एजेंसी के अनुसार, मिखाइल गोर्बाचोव ने मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में जोर देकर कहा कि सोवियत अधिकारियों ने आंतरिक और जातीय समस्याओं के दायरे और सोवियत यूनियन में सुधार की आवश्यकता को कम करके आंका था। गोर्बाचोव के अनुसार, अगस्त तख्तापलट के बाद भी, सोवियत यूनियन के समाजवादी संघ को “स्वतंत्र राज्यों के गठबंधन” के रूप में जीवित और संरक्षित करना संभव था।

गोर्बाचोव ने शनिवार को टास समाचार एजेंसी से कहा कि सबसे पहले हमने जनजातियों और केंद्र और गणराज्यों के बीच संबंधों में समस्याओं के आकार और गहराई को कम करके आंका। हमें यह महसूस करने में काफी समय लगा कि सोवियत यूनियन को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

गोर्बाचोव को सोवियत संघ की पुनर्निर्माण नीति की शुरुआत के लिए जाना जाता है। गोर्बाचोव ने उदारीकरण के जरिये साम्यवाद के ढांचे में बदलाव लाने की कोशिश की। लेकिन देश में भ्रष्टाचार कम नहीं कर पाए। 1991 में तख्तापलट का नाकाम प्रयास हुआ। अंतत: उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दिसंबर में सोवियत संघ के सभी 15 देश अलग हो गए। सोवियत संघ के बिखराव के बावजूद सदस्य देशों में विवाद हैं। जैसे यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, रूस ने उसके राज्य क्रीमिया पर कब्जा कर लिया है।

 

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