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ईरान के हमलों का डर, अमेरिका के ठिकानों को खाली कराने पर क्षेत्रीय वार्ता शुरू

ईरान के हमलों का डर, अमेरिका के ठिकानों को खाली कराने पर क्षेत्रीय वार्ता शुरू

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि कई क्षेत्रीय देशों के बीच अमेरिका के सैन्य ठिकानों को अस्थायी रूप से खाली कराने को लेकर बातचीत चल रही है।

रूसी मीडिया नेटवर्क RT के सूत्रों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों को आशंका है कि, ईरान अपने ऊपर हुए हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि पश्चिम एशिया में विदेशी सैन्य मौजूदगी क्षेत्र की अस्थिरता का बड़ा कारण है। तेहरान का मानना है कि अगर अमेरिकी ठिकाने क्षेत्र से हटते हैं तो क्षेत्रीय देशों को अधिक स्वतंत्रता और सुरक्षा मिल सकती है। इसलिए युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका के सैन्य अड्डों को बंद कराना ईरान की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है।

हाल के दिनों में ईरान ने कई अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और कूटनीतिक ठिकानों के आसपास जवाबी कार्रवाई भी की है। उदाहरण के तौर पर, ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें क़तर का अल-उदीद एयर बेस भी शामिल है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि उनके देश पर हमला किया जाता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे “वैध लक्ष्य” माने जाएंगे। यह चेतावनी पहले भी दी जा चुकी है कि जो देश अपने क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ हमलों के लिए होने देंगे, वे भी संघर्ष के दायरे में आ सकते हैं।

इसी बीच अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी स्वीकार किया है कि ईरान के शुरुआती जवाबी हमलों में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हुई है, जिसके बाद इस युद्ध में अमेरिकी सैनिकों के घोषित मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। बताया जाता है कि यह सैनिक एक महत्वपूर्ण रणनीतिक रडार प्रणाली में कार्यरत था, जो मिसाइल हमलों की शुरुआती चेतावनी देने और अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को संचालित करने में अहम भूमिका निभाता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे को भारी खतरा हो सकता है। यही कारण है कि अब क्षेत्रीय स्तर पर ऐसी कोशिशें भी दिखाई दे रही हैं जिनका उद्देश्य युद्ध के दायरे को सीमित करना और संभावित हमलों से बचाव करना है।

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