ट्रंप के हस्तक्षेप के बावजूद आइज़ेनकोट नहीं बनेंगे नेतन्याहू के सहयोगी: रिपोर्ट
इस्राईल में नई सरकार के गठन के लिए राजनीतिक दलों के बीच विचार-विमर्श जारी है। हालांकि, इस्राईल की येशर पार्टी के प्रमुख गादी आइज़ेनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में बनने वाली गठबंधन सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि, अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यक्तिगत रूप से उनसे ऐसा करने का अनुरोध करते हैं, तब भी वे अपना रुख नहीं बदलेंगे।
इस्राईली प्रसारण संस्थान ‘कान’ (KAN) ने यह जानकारी दी है। प्रसारण संस्थान ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, आइज़ेनकोट ने बंद कमरे में हुई एक बैठक के दौरान यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होऊंगा।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर ट्रंप मुझे आमंत्रित करते हैं, तो राष्ट्रपति का सम्मान करते हुए मैं उनसे मुलाक़ात ज़रूर करूंगा, लेकिन इस बात पर जोर दूंगा कि, यह इस्राईल का आंतरिक मामला है और मैं इसमें किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करूंगा।”
गौरतलब है कि आइज़ेनकोट का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब नेतन्याहू ने किसी भी व्यापक आधार वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व खुद करने पर ज़ोर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अरब समुदाय की दो प्रमुख पार्टियों—रआम (Ra’am) और जॉइंट लिस्ट (Joint List)—के समर्थन पर निर्भर किसी भी गठबंधन सरकार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
सरकार गठन की प्रक्रिया में गतिरोध
इस्राईल के विपक्षी दल इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वे राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से सिफारिश करेंगे कि अगली सरकार के गठन की जिम्मेदारी गादी आइज़ेनकोट को सौंपी जाए।
इस संबंध में बुधवार और गुरुवार को राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श शुरू होने वाला है। यायर गोलान की पार्टी ‘डेमोक्रेट्स’ ने सोमवार को आइज़ेनकोट को अपना समर्थन देने की घोषणा की। इससे पहले नफ्ताली बेनेट की पार्टी ‘टुगेदर’ और एविगडोर लिबरमैन की पार्टी ‘इस्राईल बेतेनू’ भी उनके समर्थन का ऐलान कर चुकी हैं।
जॉइंट लिस्ट और रआम के संभावित समर्थन के बाद आइज़ेनकोट को 120 सदस्यीय इस्राईली संसद (नेसेट) के 67 सदस्यों का समर्थन मिल सकता है। वहीं, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना है।
गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को हुए चुनावों के नतीजों में संसद में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। नेतन्याहू के गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली थीं। इनमें लिकुड पार्टी को 27 सीटें, यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म और ओत्ज़मा येहुदित को 7-7 सीटें, जबकि शास पार्टी और रिलीजियस ज़ायनिज्म पार्टी को 6-6 सीटें मिली थीं।

