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क़ब्ज़ाधारी फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में लिकुड की लोकप्रियता में गिरावट, नेतन्याहू की स्थिति कमज़ोर

क़ब्ज़ाधारी फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में लिकुड की लोकप्रियता में गिरावट, नेतन्याहू की स्थिति कमज़ोर

क़ब्ज़ाधारी फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में चुनावी आँकड़े लिकुड पार्टी की सीटों की संख्या में गिरावट का संकेत दे रहे हैं। पार्टी की सीटें 32 से घटकर लगभग 20 रह गई हैं। वहीं, प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्तता के सर्वेक्षण में गादी आइज़ेनकोट लगातार बढ़त बनाए हुए हैं और बेंजामिन नेतन्याहू से लगभग समान अंतर से आगे चल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी फ़ार्स की रिपोर्ट के अनुसार, मारिव समाचार पत्र के विश्लेषक बेन कास्पिट ने कहा कि सर्वेक्षणों में लिकुड पार्टी की सीटें 32 से गिरकर लगभग 20 रह गई हैं। यह गिरावट पार्टी की चुनावी ताकत के लगभग एक-तिहाई हिस्से के खोने का संकेत है। लिकुड से दूर हुए दक्षिणपंथी मतदाताओं के वोट मुख्य रूप से नफ्ताली बेनेट और एविग्डोर लिबरमैन के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों की ओर जा रहे हैं।

वहीं, गादी आइज़ेनकोट पिछले लगातार तीन महीनों से प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए उपयुक्तता के सूचकांक में बेंजामिन नेतन्याहू से आगे चल रहे हैं। दोनों के बीच यह अंतर लगभग 8.5 प्रतिशत बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति इस्राइल के प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर जनता के घटते भरोसे को दर्शाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेतन्याहू के क़रीबी लोगों ने गवाहों और विरोधियों के ख़िलाफ़ ब्लैकमेल तथा डराने-धमकाने के तरीकों का इस्तेमाल करके संगठित आपराधिक गिरोहों जैसा व्यवहार अपनाया है। रिपोर्ट में उद्धृत आधिकारिक बयानों में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और राजनीतिक प्रभाव का दुरुपयोग करने के लिए ग़ैर-कानूनी गतिविधियों के कुछ मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के एक अन्य हिस्से में कहा गया है कि शाबाक (इस्राइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी) के प्रमुख रोनन बार ने 7 अक्टूबर की घटनाओं से पहले नेतन्याहू को 26 दस्तावेज़-आधारित चेतावनियाँ दी थीं। इन चेतावनियों में स्पष्ट रूप से ग़ाज़ा पर पूर्वव्यापी हमले करने और याह्या सिनवार की हत्या करने की सिफ़ारिश की गई थी। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल के प्रधानमंत्री ने इन सभी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया।

रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि विपक्षी दलों के पास भविष्य में गठबंधन सरकार बनाने और मौजूदा गठबंधन को सत्ता से हटाने का वास्तविक अवसर मौजूद है। इस संभावना का आधार दक्षिणपंथी खेमे के ऐसे पूर्व नेताओं और प्रमुख चेहरों का समर्थन है, जो नेतन्याहू के सत्ता में बने रहने का विरोध करते हैं। विपक्ष आगामी चुनावों के ज़रिए मौजूदा गठबंधन को हटाने की रणनीति के तहत इन नेताओं के समर्थन पर भरोसा कर रहा है।

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