वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल परिवार की संवैधानिक जिम्मेदारी है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को सिर्फ परिवार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी करार दिया है। जयपुर बेंच ने राज्य के सभी 31 वृद्धाश्रमों (ओल्ड एज होम्स) की स्थिति की जांच के आदेश दिए हैं और 15 फरवरी तक उनकी रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने कहा कि वृद्धाश्रम केवल कागजी औपचारिकता नहीं होने चाहिए। वहां रहने वाले बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा, बेहतर चिकित्सा और मानवीय गरिमा के साथ जीवन का अधिकार मिलना चाहिए।
पहले बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता था
हाईकोर्ट ने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए बताया कि पहले बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता था, लेकिन आधुनिक समाज में संयुक्त परिवार टूटने, शहरीकरण और बदलती जीवनशैली ने उन्हें उपेक्षित और असहाय बना दिया है।
2046 तक देश में बच्चों की तुलना में बुजुर्गों की संख्या अधिक हो जाएगी
अदालत ने चेतावनी दी कि 2046 तक देश में बच्चों की तुलना में बुजुर्गों की संख्या अधिक हो जाएगी। 2022 में बुजुर्गों की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 10.5% थी, जो 2050 तक 20% से अधिक हो सकती है। यदि अभी से ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो यह भविष्य में गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकता है।
कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिला प्राधिकरणों को जिम्मेदारी दी है कि वे वृद्धाश्रमों में मिलने वाली सुविधाओं की जांच करें। इसमें चिकित्सा सुविधा, भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, सुरक्षा, भवन की स्थिति जैसे सभी पहलुओं का मूल्यांकन शामिल होगा। सुनवाई में लोक उत्थान संस्थान की जनहित याचिका पर चर्चा हुई, जिसमें वृद्धाश्रमों की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए गए थे।
बुजुर्गों का जीवन सम्मानजनक और सुरक्षित होना चाहिए
सरकार ने कोर्ट को बताया कि कई पुनर्वास केंद्रों को वृद्धाश्रम बताकर सूची में शामिल किया गया है, जबकि वास्तविक संचालन में कमी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों का जीवन सम्मानजनक और सुरक्षित होना चाहिए। अदालत ने कहा कि सिर्फ संख्या बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि वहां रहने वाले बुजुर्गों के लिए सुविधाएं वास्तविक और गुणवत्ता पूर्ण हैं। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में बुजुर्गों के अधिकार और गरिमा की अनदेखी नहीं हो सकती।
इस आदेश से स्पष्ट हुआ कि राजस्थान में वृद्धाश्रमों की कार्यप्रणाली में सुधार लाना अब राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है। बुजुर्गों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन और रहने की स्थिति पर तुरंत नजर रखी जाएगी। इस तरह हाईकोर्ट ने न केवल वृद्धाश्रमों की जांच का आदेश दिया है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए राज्य को संवैधानिक जिम्मेदारी भी याद दिलाई है।

