लेबनानी पत्रकार का शव घंटों की तलाश के बाद मलबे के नीचे से बरामद
लेबनान की पत्रकार आमल खलील, जो इज़रायली हमले में मारी गईं थीं उनका शव मलबे से बरामद कर लिया गया है। गोली लगने के बाद उनके पास पहुंचने की कोशिश कर रही एंबुलेंसों पर इज़रायली सेना द्वारा गोलीबारी किए जाने के कारण उनके बचाव अभियान में देरी हुई।
हालांकि कई घंटों की तलाश के बाद मलबे के नीचे से इस पत्रकार का शव बरामद कर लिया गया। वह 2 मार्च के बाद से इज़रायल द्वारा ऑपरेशन के दौरान मारी गईं चौथी पत्रकार हैं।
पत्रकार आमल खलील की मौत एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों की सुरक्षा कितनी कमजोर हो गई है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि युद्ध के दौरान मानवीय सिद्धांतों—खासतौर पर घायल लोगों और पत्रकारों की सुरक्षा—पर गंभीर सवाल उठाती है।
बताया जा रहा है कि आमल खलील, लेबनान के अख़बार “अल-अख़बार” से जुड़ी थीं और संघर्ष क्षेत्र से रिपोर्टिंग कर रही थीं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पहले उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया और जब उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए एक घर में शरण ली, तो वह जगह भी हमले का शिकार बन गई। इस हमले में उनकी सहयोगी और फोटो पत्रकार ज़ैनब फ़रज भी गंभीर रूप से घायल हो गईं, जो यह दिखाता है कि मीडिया कर्मी सीधे खतरे में काम कर रहे हैं।
2 मार्च के बाद से यह चौथा मामला बताया जा रहा है जब किसी पत्रकार की मौत हुई है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मानवाधिकार समूहों द्वारा पहले भी बार-बार यह कहा जाता रहा है कि युद्ध क्षेत्रों में पत्रकारों को निशाना बनाए जाने या उनकी सुरक्षा में लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह सवाल रखा है कि क्या संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों—जैसे नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा—का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं, और अगर नहीं, तो इसके लिए जवाबदेही कैसे तय की जाएगी।

