अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान पर अराक़ची की प्रतिक्रिया:
अराक़ची ने कहा कि, रुबियो ने ऐसी बात स्वीकार की है, जिसे हम सब पहले से जानते थे—कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी इच्छा से, इज़रायल के हित में, इस युद्ध में प्रवेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से अमेरिका के खिलाफ कभी भी कोई तथाकथित “खतरा” मौजूद नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि इसलिए अमेरिकी और ईरानी लोगों का खून बहने की जिम्मेदारी उन लोगों पर है जो “इज़रायल फर्स्ट” की सोच में विश्वास रखते । उन्होंने ने यह भी कहा कि अमेरिका की जनता इससे बेहतर की हकदार है और उन्हें अपना देश वापस लेना चाहिए।
यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें अराक़ची ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि युद्ध में शामिल होना उसका स्वयं का निर्णय था, न कि किसी वास्तविक खतरे का परिणाम।
अराक़ची का तर्क है कि यदि स्वयं अमेरिकी नेतृत्व यह स्वीकार कर रहा है कि युद्ध में शामिल होना एक “चयन” था, तो फिर ईरान को आक्रामक बताने की कथा कमजोर पड़ जाती है। उनके अनुसार, ईरान ने कभी भी अमेरिका के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सैन्य खतरा पैदा नहीं किया, बल्कि वह अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय संतुलन की रक्षा की नीति पर कायम रहा है।
ईरानी दृष्टिकोण से देखा जाए तो मध्य-पूर्व में अस्थिरता का बड़ा कारण बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप रहा है। अराक़ची ने यह भी कहा कि अमेरिकी और ईरानी नागरिकों का खून बहना उन नीतियों का परिणाम है जो “इज़रायल फर्स्ट” सोच को प्राथमिकता देती हैं, न कि क्षेत्रीय शांति और संवाद को।
उनका संकेत इस ओर था कि आम अमेरिकी जनता युद्ध नहीं चाहती, बल्कि स्थिरता, आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक सम्मान चाहती है।

