ताइज़ को पूरी तरह मुक्त कराने से एक क़दम दूर अंसारुल्लाह
यमनी लड़ाके ताइज़ पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित करने के क़रीब पहुँच गए हैं। उन्होंने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ “राजधानी के बदले राजधानी” की रणनीति सक्रिय करने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, यमन में अंसारुल्लाह (हूती) बलों ने ताइज़ प्रांत के दक्षिणी हिस्सों और पश्चिमी लहज में हाल के दिनों में अपनी सैन्य गतिविधियाँ तेज कर दी हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, अंसारुल्लाह ने कई रणनीतिक पहाड़ी क्षेत्रों और महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों पर अपना नियंत्रण मज़बूत किया है। इन प्रगति को ताज़ शहर और उसके आसपास के इलाकों पर दोबारा व्यापक नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अंसारुल्लाह ने अल-शुमैतिन, जबल हबशी, अल-मवासित और आसपास के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के साथ-साथ लहज प्रांत के कहबूब इलाके में भी कई रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण मज़बूत किया है। इनमें जबल हजीजा, जबल कलआ और अन्य पहाड़ी क्षेत्र शामिल बताए गए हैं। विशेष रूप से रासिन पर्वत श्रृंखला और जबल जर्दान को रणनीतिक महत्व वाला क्षेत्र बताया गया है, क्योंकि इन ऊँचाइयों से ताइज़ के दक्षिणी हिस्सों और महत्वपूर्ण सैन्य एवं आपूर्ति मार्गों पर निगरानी रखी जा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सऊदी समर्थित यमनी गुटों ने बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी स्थिति मज़बूत करने तथा ज़ुबाब क्षेत्र की ओर जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इस दौरान सऊदी अरब की ओर से हवाई समर्थन दिए जाने का भी दावा किया गया है।
इसके साथ ही ख़बर का दूसरा प्रमुख पहलू यमन और सऊदी अरब के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ताइज़ और पश्चिमी लहज के संघर्ष क्षेत्रों में कई हवाई हमले किए। अंसारुल्लाह की ओर से दावा किया गया कि इन हमलों के जवाब में यमनी बलों ने सऊदी अरब के भीतर सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
रिपोर्ट में यानबू स्थित अरामको की सुविधाओं तथा ताइफ़, ख़मीस मुशैत और रियाद के सैन्य ठिकानों एवं हवाई अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का उल्लेख किया गया है। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मालिकी के हवाले से कहा गया है कि रियाद के अलावा बिशा, अल-खर्ज, यानबू, फरासान और ताइफ़ भी हमलों से प्रभावित हुए।
अंसारुल्लाह के एक सैन्य सूत्र ने कथित तौर पर इस नई नीति को “घेराबंदी के बदले घेराबंदी, हमले के बदले हमला और राजधानी के बदले राजधानी” की रणनीति बताया। रिपोर्ट के अनुसार, इसका अर्थ यह है कि यमन पर होने वाले सैन्य हमलों के जवाब में सऊदी अरब के महत्वपूर्ण और राजनीतिक केंद्रों को भी निशाना बनाने की नीति अपनाई जा रही है।
कुल मिलाकर, खबर दो प्रमुख घटनाक्रमों पर केंद्रित है:
पहला, ताज़ और लहज के मोर्चों पर अंसारुल्लाह की कथित सैन्य प्रगति;
दूसरा, यमन तथा सऊदी अरब के बीच मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों के माध्यम से बढ़ता सैन्य टकराव।

