अमेरिका अपने वास्तविक उद्देश्यों को लेकर गहरे भ्रम में है: अराक़ची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की धमकी देने, “ईरानियों को समझौता करना ही होगा” और “मेरे पास ज़्यादा सब्र नहीं है” जैसे बयानों के साथ-साथ यह कहने कि “हम यह युद्ध इज़रायल और खाड़ी देशों की मदद के लिए कर रहे हैं” जैसी बातें परस्पर विरोधाभासी और अतार्किक बयानबाज़ी हैं, जो किसी भी तरह की वार्ता प्रक्रिया के खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने की बात कुछ दिन पहले की है, लेकिन आज अचानक इसे मीडिया में प्रमुखता से क्यों उठाया जा रहा है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
अराक़ची ने कहा कि ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला एक बार पहले भी हो चुका है और इस तरह के विरोधाभासी बयान इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका अपने वास्तविक उद्देश्यों को लेकर गहरे भ्रम में है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास युद्ध समाप्त करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और वह हर दिन अलग-अलग लक्ष्य सामने रखता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्हाइट हाउस में दोबारा समझदारी और तर्कसंगत सोच लौटेगी।
ईरान से समृद्ध यूरेनियम को रूस भेजे जाने के मुद्दे पर अराकची ने कहा कि उनकी रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी है और उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर सभी मुद्दों पर चर्चा की, जिनमें यह विषय भी शामिल था।
उन्होंने कहा कि ईरान रूस के उस प्रस्ताव और सहयोग की इच्छा की सराहना करता है, जिसके तहत वह इस मामले के समाधान में मदद करना चाहता है। हालांकि यह ऐसा विषय है जिस पर अंतिम निर्णय वार्ताओं के दौरान ही लिया जाएगा।
अराक़ची ने कहा कि ईरान के समृद्ध परमाणु पदार्थ का मुद्दा बेहद जटिल है और अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत में इस निष्कर्ष पर पहुँचा गया है कि चूँकि इस विषय पर फिलहाल लगभग गतिरोध की स्थिति है, इसलिए इसे बातचीत के अगले चरणों के लिए टाल देना बेहतर होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह मुद्दा किसी वार्ता या बातचीत के एजेंडे में शामिल नहीं है, लेकिन भविष्य में इस पर चर्चा होगी। उस समय रूस के साथ और अधिक परामर्श किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि रूस का प्रस्ताव इस समस्या के समाधान में कितना सहायक हो सकता है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के साथ मतभेद समाप्त होने की उम्मीद से जुड़े सवाल पर अराकची ने कहा कि ईरान को इन देशों से कोई समस्या नहीं है और वे ईरान के निशाने पर भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सभी पक्ष किसी साझा समझ तक पहुँचेंगे, क्योंकि क्षेत्र के देश सदियों से साथ रहते आए हैं।
अराक़ची ने कहा कि अमीराती नेतृत्व को इस वास्तविकता को समझना चाहिए। यदि वे समझदारी और तर्कसंगत नीति की ओर लौटते हैं, तो वे ईरान को एक मित्र के रूप में देख सकते हैं।

