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अली लारीजानी का मुसलमानों और इस्लामी देशों के नाम 6 बिंदुओं वाला पत्र

अली लारीजानी का मुसलमानों और इस्लामी देशों के नाम 6 बिंदुओं वाला पत्र

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

दुनिया के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों के नाम

1. ईरान ऐसे समय में अमेरिका-इज़रायल की एक छलपूर्ण आक्रामक कार्रवाई का सामना कर रहा था, जब बातचीत चल रही थी। इस हमले का उद्देश्य ईरान को विभाजित करना था। इस दौरान इस्लामी क्रांति के महान और समर्पित नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई, कई आम नागरिक और सैन्य कमांडर शहीद हो गए। लेकिन इसके जवाब में ईरानी जनता ने राष्ट्रीय और इस्लामी प्रतिरोध का रास्ता अपनाया।

2. आप जानते हैं कि कुछ दुर्लभ राजनीतिक बयानों को छोड़कर लगभग किसी भी इस्लामी देश की सरकार, ईरानी जनता की मदद के लिए आगे नहीं आई। इसके बावजूद ईरान की जनता ने अपने मजबूत संकल्प से दुश्मन को परास्त किया, इस तरह कि आज दुश्मन खुद नहीं समझ पा रहा कि इस रणनीतिक संकट से कैसे निकले।

3. ईरान, अमेरिका और इज़रायल (बड़े और छोटे शैतान) के खिलाफ प्रतिरोध के रास्ते पर आगे बढ़ता रहेगा। लेकिन क्या इस्लामी देशों का रवैया पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) के उस कथन के विपरीत नहीं है जिसमें उन्होंने कहा था: “यदि कोई मुसलमान दूसरे मुसलमान की पुकार का जवाब न दे, तो वह मुसलमान नहीं है।” आखिर यह कैसी मुस्लिम एकता है?

4. कुछ देशों ने तो इससे भी आगे बढ़कर कहा कि, क्योंकि ईरान ने उनके देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और अमेरिका-इज़रायल के हितों को निशाना बनाया है, इसलिए ईरान उनका दुश्मन है। क्या ईरान हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहता, जबकि उन्हीं देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों से ईरान पर हमले किए जा रहे थे?

यह केवल बहानेबाजी है। आज इस संघर्ष के एक तरफ अमेरिका और इज़रायल हैं और दूसरी तरफ मुस्लिम ईरान और प्रतिरोध की ताकतें। आप किस पक्ष में खड़े हैं?

5. इस्लामी दुनिया के भविष्य के बारे में सोचिए। आप जानते हैं कि अमेरिका आपसे कभी वफादारी नहीं निभाएगा और इज़रायल आपका दुश्मन है। एक पल रुककर अपने और क्षेत्र के भविष्य के बारे में विचार कीजिए। ईरान आपका शुभचिंतक है और आप पर प्रभुत्व जमाने की कोई इच्छा नहीं रखता।

6. इस्लामी उम्मत की एकता ही वह शक्ति है जो सभी देशों की सुरक्षा, प्रगति और स्वतंत्रता की गारंटी दे सकती है।

बंदा-ए-खुदा

अली लारीजानी

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