अफ़ग़ानिस्तान ने खुल्लमखुल्ला तौर पर ईरान के समर्थन का ऐलान किया
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने घोषणा की है कि यदि इस्लामी गणराज्य ईरान पर कोई हमला या आक्रमण होता है, तो अफ़ग़ानिस्तान की जनता ईरान के साथ विभिन्न प्रकार का समर्थन और एकजुटता दिखाएगी। तालिबान ने ईरान के समर्थन में जो बयान दिया है, वह ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही उबल रहा है।
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को कहा,
“यदि इस्लामी गणराज्य ईरान किसी भी तरह के आक्रमण का सामना करता है, तो अफ़ग़ानिस्तान की जनता अपने ईरानी भाइयों के प्रति विभिन्न रूपों में एकजुटता और समर्थन प्रकट करेगी।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह समर्थन केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय भाईचारे और इस्लामी एकता के आधार पर व्यापक सहयोग का रूप ले सकता है। हालांकि उन्होंने किसी सैन्य सहयोग का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके शब्दों को एक सख्त राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को ध्यान में रखकर दिया गया है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच तालिबान का यह रुख साफ तौर पर बताता है कि वह ईरान के खिलाफ किसी बाहरी दबाव या कार्रवाई के मामले में तटस्थ रहने के बजाय समर्थन की नीति अपनाना चाहता है।
गौरतलब है कि तालिबान और ईरान के संबंध हमेशा सीधे-सपाट नहीं रहे हैं। अतीत में दोनों के बीच कई बार तनाव भी देखने को मिला, खासकर सीमा सुरक्षा और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर। इसके बावजूद, मौजूदा हालात में दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक समझ बढ़ती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान केवल एक कूटनीतिक संकेत नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समीकरणों में एक संभावित ध्रुवीकरण की ओर इशारा भी हो सकता है। अब देखना यह है कि यह समर्थन सिर्फ शब्दों तक रहता है या आने वाले दिनों में किसी ठोस कदम के रूप में भी सामने आता है।

