ईरान के साथ युद्ध आज़ादी और शांति के लिए नहीं, बल्कि तेल के लिए है: जर्मन पार्टी नेता
जर्मनी की दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी “ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी” (AfD) के सह-नेता टीनो क्रुपाला ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस तरह के युद्धों को अक्सर “आज़ादी और शांति” के नाम पर पेश किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में इनके पीछे तेल, डॉलर और भू-राजनीतिक हित जैसे आर्थिक कारण होते हैं।
क्रुपाला ने अमेरिकी अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि खुद अमेरिका के भीतर से यह बात सामने आई है कि ईरान न तो किसी तत्काल हमले की योजना बना रहा था और न ही वह परमाणु बम बनाने के बेहद करीब था। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब खतरा इतना बड़ा नहीं था, तो फिर युद्ध जैसी स्थिति क्यों बनाई जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का इतिहास बहुत नकारात्मक रहा है। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान, बुनियादी ढांचे की तबाही, ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि और शरणार्थियों का संकट पैदा हुआ है, जिसका असर यूरोप तक महसूस किया गया है।
क्रुपाला ने जर्मनी की नीति पर भी जोर देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी भी विदेशी सैन्य संघर्ष में शामिल होने के खिलाफ है। उनका मानना है कि जर्मनी को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए, न कि दूसरे देशों के युद्धों में उलझना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि जर्मनी को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रह सके।

