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अमेरिकियों का बड़ा कबूलनामा: ईरान की ताकत ने अमेरिका को जाल में फंसा दिया

अमेरिकियों का बड़ा कबूलनामा: ईरान की ताकत ने अमेरिका को जाल में फंसा दिया

राबर्ट पेप, जो University of Chicago में राजनीतिक विश्लेषक और प्रोफेसर हैं, ने एक अहम बयान में कहा कि अमेरिका का असली उद्देश्य ईरान की सरकार को गिराना और उसकी सैन्य व क्षेत्रीय ताकत को कमजोर करना था। लेकिन 17 दिनों के संघर्ष के बाद स्थिति उलट गई है—ईरान न केवल डटा रहा, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावशाली बनकर सामने आया है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका पिछले करीब 50 वर्षों से Strait of Hormuz पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करता रहा है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। लेकिन मौजूदा हालात में यह रणनीति बुरी तरह विफल होती दिखाई दे रही है। इस नाकामी ने न सिर्फ अमेरिका की सैन्य योजना पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उसकी वैश्विक साख को भी नुकसान पहुंचाया है।

पेप के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देश भी खुलकर उसका साथ देने से हिचकिचाए। इन देशों को डर था कि ईरान की बढ़ती शक्ति के सामने खड़े होने से वे खुद भी बड़े खतरे में पड़ सकते हैं। यही वजह रही कि अमेरिका को इस संघर्ष में अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल पाया।

उन्होंने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि अमेरिका इस समय एक “रणनीतिक जाल” में फंस चुका है—जहां से निकलना आसान नहीं है। हर दिन यह स्थिति और जटिल होती जा रही है, जिससे अमेरिका की स्थिति और कमजोर तथा ईरान की स्थिति और मजबूत होती नजर आ रही है।

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