ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4” की 82वीं लहर शुरू: अमेरिका और इज़रायल के ख़िलाफ़ नया मोर्चा
आईआरजीसी जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, “वादा-ए-सादिक 4” ऑपरेशन की 82वीं लहर पहले की तुलना में अधिक व्यापक और समन्वित रूप में सामने आई है। इस चरण में न केवल हमलों की संख्या बढ़ी है, बल्कि लक्ष्यों की रणनीतिक अहमियत भी काफी ज्यादा बताई जा रही है।
बताया गया है कि इस लहर को “या फ़ारिस अल-हिजाज़” कोड के तहत अंजाम दिया गया, और इसमें कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, संचार प्रणाली, रडार नेटवर्क और ड्रोन बेस जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया। इन हमलों का उद्देश्य विरोधी पक्ष की निगरानी, संचार और जवाबी क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है।
निशाने पर रहे प्रमुख क्षेत्र:
उत्तरी क्षेत्र में किर्यात शमोना
मध्य और दक्षिणी तेल अवीव
हाइफ़ा जैसे अहम औद्योगिक और सैन्य क्षेत्र
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डे: अल-धफरा (यूएई), अली अल-सालेम और अरीफ़जान (कुवैत)
इन हमलों में खैबर-शिकन, ज़ुल्फ़िकार, इमाद और क़द्र जैसी मध्यम और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें कुछ मल्टीपल वारहेड (एक साथ कई लक्ष्यों पर असर डालने की क्षमता) से लैस बताई जा रही हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में आत्मघाती ड्रोन भी तैनात किए गए, जो सटीकता के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जाने जाते हैं।
समन्वित “प्रतिरोध नेटवर्क” की भूमिका: इस अभियान की खास बात विभिन्न सहयोगी समूहों के बीच समन्वय रही—
हिज़्बुल्लाह (लेबनान) ने 87 ऑपरेशन किए, जिनमें सीमा क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया
इराकी प्रतिरोध समूहों ने 23 हमलों में हिस्सा लिया
ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने 110 से अधिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर अलग-अलग मोर्चों से एक साथ कार्रवाई की गई, जिससे विरोधी पक्ष पर बहु-दिशात्मक दबाव बना।
रणनीतिक संकेत: यह घटनाक्रम इस ओर इशारा करता है कि संघर्ष अब सीमित टकराव से आगे बढ़कर एक व्यापक क्षेत्रीय रूप ले सकता है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हमलों का उद्देश्य केवल तात्कालिक नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि लंबी अवधि में विरोधी की सैन्य और लॉजिस्टिक क्षमता को प्रभावित करना भी है।
हालांकि, इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अक्सर मुश्किल होती है, और अलग-अलग पक्षों की ओर से जानकारी में अंतर भी देखने को मिलता है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में तनाव एक नए और अधिक जटिल चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के टकराव तेज़ हो सकते हैं।
अंत में जारी संदेश—
“हम तुम्हें छोड़ेंगे नहीं”—इस पूरे अभियान के आक्रामक रुख और आगे भी कार्रवाई जारी रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

