ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4” की 28वीं लहर क़द्र, इमाद और ख़ैबर-शिकन मिसाइलों के साथ शूरू
ईरान की ओर से जारी वीडियो और तस्वीरों में बताया गया है कि ऑपरेशन “वादा-ए-सादिक 4” की 28वीं लहर के दौरान कई उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इस चरण में मुख्य रूप से क़द्र, इमाद और ख़ैबर-शिकन मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन मिसाइलों को अलग-अलग प्रकार के शक्तिशाली वारहेड से लैस किया गया था, जिससे हमले की क्षमता और प्रभाव बढ़ाया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार क़द्र मिसाइल को इस बार मल्टी-वॉरहेड तकनीक से लैस किया गया था। इसका मतलब है कि एक ही मिसाइल के अंदर 10 से 20 तक अलग-अलग वारहेड लगाए गए थे, जो लक्ष्य के करीब पहुंचकर अलग-अलग दिशा में गिर सकते हैं। इस तकनीक का उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल-रोधी रक्षा प्रणाली को भ्रमित करना और अधिक नुकसान पहुंचाना होता है।
वहीं इमाद मिसाइल को 750 किलोग्राम से लेकर लगभग 1 टन तक के भारी वारहेड के साथ दागा गया। यह मिसाइल अपनी उच्च सटीकता और लंबी दूरी की मारक क्षमता के लिए जानी जाती है, इसलिए इसे रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
इसके अलावा ख़ैबर-शिकन मिसाइल भी इस हमले में शामिल रही। यह ठोस ईंधन से चलने वाली और तिरछे (एंगल से) प्रक्षेपित की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 1450 किलोमीटर बताई जाती है। सैन्य विश्लेषकों के अनुसार पिछले अभियानों और मिसाइल लहरों में ख़ैबर-शिकन की लक्ष्य भेदने की दर सबसे अधिक देखी गई है, इसलिए इसे हमले की महत्वपूर्ण मिसाइलों में गिना जाता है।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इस लहर में अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों का एक साथ उपयोग करके हमले की रणनीतिक क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ाने की कोशिश की गई, ताकि दुश्मन की वायु-रक्षा प्रणाली पर दबाव बनाया जा सके और अधिक से अधिक लक्ष्यों को भेदा जा सके।

