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क़ासिम सुलैमानी की हत्या कर अमेरिका ने इराक से अपनी वापसी पर मुहर लगा दी

अरब जगत के प्रख्यात समाचार पत्र रायुल यौम के लिए लिखे गए अपने संपादकीय में प्रख्यात विश्लेषक एवं पत्रकार अब्दुल बारी अतवान ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्र्पति ट्रम्प ने फिलिस्तीन, लेबनान, सीरिया, इराक, यमन और अफगानिस्तान में प्रतिरोध को एकजुट करने वाले मेजर जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या कर सोचा था कि वह ईरान और प्रतिरोधी मोर्चे को संकट में डाल देगा लेकिन ईरान और प्रतिरोधी दलों के खिलाफ अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बाद भी ईरान और प्रतिरोधी मोर्चा और अधिक शक्तिशाली हो चुका है।
अमेरिका और इस्राईल ने सोचा था कि वह मेजर जनरल सुलैमानी की हत्या कर ईरान और प्रतिरोध को कमज़ोर कर देंगे और क़ासिम सुलैमानी का कोई विकल्प नहीं मिलेगा लेकिन आज एक साल गुज़रने के बाद अमेरिका और इस्राईल की क्षेत्र में स्थिति दयनीय है।
अब्दुल बारी के अनुसार क़सीम सुलैमानी की शहादत ने ईरान की इस्लामी क्रांति में नई जान फूंक दी है तथा ईरान की समस्त जनता को एकता के सूत्र में पिरो दिया है। जनरल सुलैमानी की मौत ने वह काम कर दिखाया जो शायद वह ज़िंदा रहते हुए न कर पाते उनकी हत्या के बाद इराक पार्लियामेंट ने अमेरिकी सेना को देश से निकालने का क़ानून पारित किया जिसके लिए क़ासिम सुलैमानी जीते जी इराक को तैयार न कर पाते।

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