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हिज्बुल्लाह की दो टूक, लेबनान न कभी अमेरिका के प्रभाव में जाएगा, न इस्राईल की बस्ती बनेगा

बेरूत/सूर: लेबनान की संसद में हिज़्बुल्लाह के संसदीय ब्लॉक “वफादारी टू द रेज़िस्टेंस” के सदस्य हसन इज़्ज़ुद्दीन ने प्रस्तावित “फ्रेमवर्क समझौते” की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लेबनान का भविष्य न तो अमेरिका के संरक्षण में होगा और न ही उसे इस्राईल की बस्ती बनने दिया जाएगा।

यह बयान दक्षिणी लेबनान के शहर सूर में हिज़्बुल्लाह द्वारा आयोजित “हम प्रतिरोध करेंगे, समझौता नहीं” शीर्षक वाले विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया। कार्यक्रम में सांसदों, राजनीतिक और धार्मिक हस्तियों, शहीदों के परिजनों तथा बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

हसन इज़्ज़ुद्दीन ने कहा कि प्रतिरोध लेबनानी जनता की पहचान और स्वतंत्र राष्ट्रों की स्वाभाविक भावना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लेबनान का समाज कर्बला की विचारधारा से प्रेरित है, जो अत्याचार के खिलाफ खड़े होने, पीड़ितों का साथ देने और मातृभूमि की रक्षा का संदेश देती है।

उन्होंने दावा किया कि प्रतिरोध ने पिछले वर्षों में दक्षिणी लेबनान को आज़ादी दिलाई, देश की संप्रभुता, जनता, प्राकृतिक संसाधनों और राष्ट्रीय संपदा की रक्षा की तथा क्षेत्र में लेबनान की स्थिति को मजबूत किया।

इज़्ज़ुद्दीन ने लेबनानी सरकार की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि प्रत्यक्ष वार्ता और बिना किसी शर्त के रियायतें देकर सरकार खुद को विरोधी पक्ष और उसके समर्थकों की मांगों के सामने कमजोर बना रही है। उनके अनुसार यह नीति लेबनान की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है तथा इससे सरकार को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित “फ्रेमवर्क समझौता” इस्राईल के कथित अपराधों को नज़रअंदाज़ करता है और पूर्ण वापसी के बजाय केवल सैन्य बलों की पुनः तैनाती की बात करता है, जिससे कब्ज़ा बनाए रखने का रास्ता खुल सकता है।

हसन इज़्ज़ुद्दीन ने यह भी दावा किया कि इस्राईल ने दक्षिणी लेबनान से पूर्ण वापसी को हिज़्बुल्लाह के हथियार छोड़ने की शर्त से जोड़ दिया है, जबकि उनके अनुसार पिछले युद्धों में वह सैन्य बल के जरिए यह लक्ष्य हासिल करने में विफल रहा था।

उन्होंने कहा कि लेबनान की जनता से प्रतिरोध के हथियार छीनने का किसी को अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक वास्तविक युद्धविराम सुनिश्चित नहीं कर सकी है, इसके बावजूद बातचीत को सबसे आसान और कम खर्चीला विकल्प बता रही है, जबकि इस्राईल के हमले जारी हैं।

अपने संबोधन के अंत में इज़्ज़ुद्दीन ने आरोप लगाया कि इस्राईल अपनी रणनीतिक विफलताओं से उबरने के लिए लेबनान में आंतरिक अस्थिरता पैदा करना चाहता है, लेकिन हिज़्बुल्लाह ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।

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