यमन: अंसारुल्लाह यमन के वरिष्ठ अधिकारी ने सऊदी अरब की क्षेत्रीय नीतियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उस पर तल अवीव के समर्थन में काम करने के आरोप लगाए हैं। अल-मसीरा के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अंसारुल्लाह की सरकार के उप विदेश मंत्री अब्दुलवाहिद अबू रास ने दावा किया कि कुछ अरब सरकारें, खासकर सऊदी अरब, क्षेत्र के देशों को लगातार आंतरिक विवादों और संकटों में उलझाए रखने की नीति पर काम कर रही हैं।
अबू रास का आरोप है कि इन संघर्षों और राजनीतिक संकटों की वजह से अरब और मुस्लिम देशों की ताकत तथा संसाधन कमजोर हो रहे हैं और इसका फायदा क्षेत्र में इस्राईली हितों को मिल रहा है।
अब्दुलवाहिद अबू रास ने कहा कि अगर सऊदी अरब की नीतियों का ध्यान से विश्लेषण किया जाए तो यह दावा किया जा सकता है कि रियाज़ क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में विवादों और संकटों से जुड़ी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने यमन से लेकर लेबनान, लीबिया, सूडान, इराक और सोमालिया तक कई देशों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन जगहों पर जारी संघर्ष और अस्थिरता की वजह से जनता का ध्यान फिलिस्तीन के मुद्दे से हट रहा है।
उनके मुताबिक, लगातार घरेलू और क्षेत्रीय समस्याओं में उलझे रहने के कारण इन देशों के पास फिलिस्तीनी मुद्दे पर प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने और इस्राईल के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने की क्षमता कम हो जाती है।
अबू रास ने अपने बयान में सऊदी अरब की आर्थिक भूमिका पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भी उन्हें इस्राईली महत्वाकांक्षाओं से जुड़े हित दिखाई देते हैं, वहां सऊदी धन और प्रभाव सक्रिय हो जाता है।
उन्होंने कहा कि रियाज़ को अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं बदलते हुए इस्राईल की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और उसके खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए।
अबू रास ने इस्राईल को निशाना बनाते हुए उसे ऐसा खतरा बताया, जो पूरे क्षेत्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है। यमनी नेता के बयान पर अभी तक सऊदी अरब की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अंसारुल्लाह नेता ने दावा किया कि जब भी कोई देश या जनता फिलिस्तीनियों के समर्थन के लिए खुद को संगठित करने की कोशिश करती है, तब उसे आंतरिक समस्याओं और राजनीतिक संकटों में उलझाने के प्रयास किए जाते हैं।
उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य जनता की प्राथमिकताओं को बदलना और फिलिस्तीन के समर्थन की दिशा में बढ़ रहे प्रयासों को कमजोर करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जारी विभिन्न संकटों का इस्तेमाल इसी मकसद के लिए किया जा रहा है, ताकि अरब और मुस्लिम समाजों की ऊर्जा आंतरिक संघर्षों में खर्च होती रहे।
अंसारुल्लाह के इस बयान को यमन और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यमन युद्ध के दौरान सऊदी अरब अंसारुल्लाह के खिलाफ बने सैन्य गठबंधन का प्रमुख हिस्सा रहा है।
हालांकि, पिछले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और राजनीतिक समाधान तलाशने के प्रयास भी हुए हैं। इसके बावजूद क्षेत्रीय राजनीति, फिलिस्तीन का मुद्दा और इस्राईल के साथ अरब देशों के रिश्ते लगातार विवाद का विषय बने हुए हैं।

